पीरियड्स में महिलाओं को क्यों होता है दर्द? कितने तरह की होती है तकलीफ

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महिलाओं को पीरियड्स के दौरान दो तरह का दर्द होता है. पहले को प्राइमरी डिसमेनोरिया कहते हैं और दूसरे को सेकेंडरी डिसमेनोरिया

मेंस्टुअल क्रैम्प यानि पीरियड्स के दौरान होने वाली दर्द से महिलाओं को इतनी परेशान होती हैं कि वे अपने रोज़ाना के काम भी ठीक से न कर पातीं. महिलाओं को पीरियड्स के दौरान दो तरह का दर्द होता है. पहले को प्राइमरी डिसमेनोरिया कहते हैं और दूसरे को सेकेंडरी डिसमेनोरिया.

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लड़कियों को माहवारी के दौरान दर्द

महिलाएं हर महीने मासिक धर्म (Menstruation) की प्रक्रिया से गुजरती हैं. आम बोल चाल की भाषा में इसे हम पीरियड्स कहते हैं. पीरियड्स के दौरान महिलाओं में कई बदलाव देखने को मिलते हैं. पहले या पीरियड्स के दौरान महिलाओं को पेट में दर्द और ऐंठन (Stomach Pain and Cramps) जैसी समस्या शुरु हो जाती है. कुछ लड़कियों को माहवारी के दौरान पेट में मरोड़, दर्द, पिम्पल, पीठ दर्द आदि की समस्या भी होती है. सबसे पहले जानिए पीरियड्स शुरू कब होता है.

महामारी कब शुरू होती है?

किसी भी लड़की के लिए जवानी वह समय होता है जब उसका शरीर ओवरी द्वारा पैदा हुए हार्मोन की वजह से बदल रहा होता है. ऐसे में हार्मोन्स के बदलने के दौरान पीरियड्स एक मुख्य भूमिका निभाता है. आमतौर पर 8 और 13 वर्ष की उम्र के बीच की उम्र में यह शुरू होता है और इसमें स्त्री के ब्रैस्ट का विकास, अंदरुनी अंग और अंडरआर्म जगहों में बाल आना और उसकी ऊंचाई में बढ़ोतरी होती है.

पीरियड्स के दौरान दर्द की हैं दो वजह

पीरियड्स आना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसे रोका या बाधित नहीं किया जा सकता। हालाँकि मेंस्टुअल क्रैम्प यानि पीरियड्स के दौरान होने वाली दर्द से महिलाओं को इतनी परेशान होती हैं कि वे अपने रोज़ाना के काम भी ठीक से न कर पातीं. महिलाओं को पीरियड्स के दौरान दो तरह का दर्द होता है. पहले को प्राइमरी डिसमेनोरिया कहते हैं और दूसरे को सेकेंडरी डिसमेनोरिया.

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• प्राइमरी डिसमेनोरिया पेन

प्राइमरी डिसमेनोरिया में पेट के निचले भाग में दर्द होता है लेकिन यह कोई रोग नहीं है. यह दर्द पीरियड्स शुरु होने पर होता है और 2 से 3 दिन में ठीक हो जाता है. इस दौरान पेट के निचले भाग और जांघों में दर्द महसूस होता है. यह दर्द आमतौर पर किशोर लड़कियों और युवा महिलाओं को होता है क्योंकि यह पीरियड्स की शुरुआत का संकेत है.

पेट में ऐंठन गर्भाशय के सिकुड़ने के कारण होती है.

गर्भाशय में खून की कमी के कारण भी दर्द हो सकता है.

दर्द मुख्य रूप से पेट के निचले हिस्से में होता है लेकिन जांघों के पीछे और नीचे भी जा सकता है.

कुछ महिलाओं को चिड़चिड़ापन महसूस होता है.

यह एक प्राकृतिक स्थिति है और कई महिलाओं के लिए बस मामूली मासिक परेशानी है.
प्राइमरी पेन को कुछ विश्राम तकनीकों से भी कम किया जा सकता है.

• सेकेंडरी पेन

अगर गर्भाश्य में फाइब्रॉयड्स, पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिज़ीज या एंडोमेट्रिओसिस जैसी कोई बीमारी हो तो पीरियड्स के दौरान तेज़ दर्द महसूस होता है और इसे ही सेकेंडरी डिसमेनोरिया कहा जाता है.

यह दर्द तब तक शुरू नहीं हो सकता, जब तक कि किसी महिला की उम्र 20 साल न हो जाए.

यह दर्द सिर्फ पीरियड्स के महीने तक ही सीमित नहीं है बल्कि पूरी पीरियड साइकल में हो सकता है.

पीरियड्स हैवी और अधिक लंबे हो सकते हैं और सम्भोग दर्दनाक हो सकता है.

मध्यम दर्द संक्रमण सहित अन्य स्थितियों का संकेत हो सकता है, जिस पर फौरन ध्यान देने की ज़रुरत है.

अगर आप 18 वर्ष से अधिक उम्र की हैं और पीरियड्स दर्द का अनुभव कर रही हैं, तो आपको गायनाकॉलजिस्ट से परामर्श करने में संकोच नहीं करना चाहिए.

पीरियड्स शुरु होने से एक हफ्ते पहले यह दर्द बढ़ जाता है और कभी-कभी इसकी वजह से कब्ज, गैस की शिकायत भी होती है.

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