राम मंदिर में क्यों पड़ी प्राण प्रतिष्ठा की जरुरत? जाने इसका अर्थ और पूजा की विधि

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अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए सभी उत्सुक हैं. लेकिन कई लोगों को यही नहीं पता की प्राण प्रतिष्ठा क्या होती है. प्राण प्रतिष्ठा कैसे की जाती है?

राम मंदिर का उद्धघाटन 22 जनवरी 2024 को होने वाला है. इसके लिए 16 जनवरी से अनुष्ठान शुरू होंगे. वेदो में प्राण प्रतिष्ठा की विद्धि के बारे में बताया गया है.

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आज हम आपको बताएंगे की प्राण प्रतिष्ठा क्या होती है. यह जरूरी क्यूँ होती है? प्राण प्रतिष्ठा को पूरा करने की विद्धि क्या है.

प्राण प्रतिष्ठा का क्या अर्थ है

अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं. आपको बता दें की प्राण प्रतिष्ठा किसी मूर्ति को जीवित किया जाता है.

जब मंदिर में भगवान की मूर्ति स्थापित की जाती है, तो प्राण प्रतिष्ठा की जाती है. प्राण प्रतिष्ठा के समय मूर्ति को कई विद्धियों से स्थापित किया जाता है.

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क्यों की जाती है प्राण प्रतिष्ठा?

प्राण प्रतिष्ठा मूर्ति को शुद्ध और पवित्र करने के लिए की जाती है. मंत्रो और धार्मिक अनुष्ठानो की मदद से मूर्ति को शुद्ध किया जाता है.

ऐसा भी माना जाता है की इसके बाद भगवान की मूर्ति में आशीर्वाद देने और प्रार्थना सुनने की शक्ति आ जाती है.

कैसे होती है प्राण प्रतिष्ठा?

प्राण प्रतिष्ठा के समय मूर्ति की शोभा यात्रा निकाली जाती है. इसके बाद भगवान की प्रतिमा का सम्मान के साथ स्वागत होता है.

मंदिर में प्रवेश के बाद शुद्धि के लिए इस पर चन्दन का लेप लगाकर दूध में स्नान कराया जाता है.

स्नान के बाद पट या आँखें खोलना

प्राण प्रतिष्ठा में सबसे अहम पहलु होता है “पट खोलना”. जिसमे मंत्र उच्चारण से मूर्ति की आखें खोली जाती हैं, और उसको कपड़े पहनाये जाते हैं.

इसके बाद मन्त्र उच्चारण और अनुष्ठान से पुजारी मूर्ति को स्थापित करते है. अंत में पूजा अर्चना और भजन गाकर भगवान को आमंत्रित किया जाता है.  

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