किसकी कप्तानी सबसे बेहतर ?

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कपिल देव, सौरव गांगुली , एमएस धोनी , विराट कोहली यह भारतीय क्रिकेट टीम के वो अजूबे कप्तान रहे है जिन्होंने भारत के क्रिकेट को एक नए मुकाम पर पहुंचाया । चारो ने ही अपनी ज़बरदस्त कप्तानी से भारत को अनगिनत जीत हासिल करवाई है. चलिए नज़र डालते है चारो की कप्तानी ने कितना बदला भारतीय टीम का रुख।

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-भारत को आज अगर विश्व क्रिकेट में इतना महत्वपूर्ण स्थान मिला है तो इसका श्रेय सबसे ज़्यादा श्री कपिल देव जी को जाना चाहिये। कपिल देव की खूबसूरत कप्तानी में भारत ने पहली बार 1983 मे विश्व कप जीता। सबसे बड़ी बात उस वक़्त भारत क्रिकेट टीम विश्व क्रिकेट में कोई बड़ी टीम नही मानी जाती थी। विश्व क्रिकेट में हिस्सा ज़रूर लिया करती थी लेकिन कभी जीत हासिल नही कर पाती थी। जब 1983 में टीम भारत ने विश्व कप जीता तो सब हैरान रह गए। ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर खेले गए फाइनल मैच में भारतीय टीम 183 रनों पर आउट हो गई। इसके बाद दिग्गजों से सजी वेस्ट इंडीज की टीम को 140 रन पर ऑलआउट कर भारत ने वह कर दिखाया, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी और पहली बार वर्ल्ड चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। कपिल देव ने टीम में जज़्बा पैदा किया और यह ऐतिहासिक पल भारत को सौपा । कपिल ने जिम्बाब्वे के खिलाफ करो या मरो के मुकाबले में 175 रन ठोक डाले थे. कपिल की इस पारी के बाद खिलाड़ियों का खुद पर यकीन बढ़ा और इसके बाद जो हुआ, वो इतिहास के पन्नों में दर्ज है. भारत ने वेस्टइंडीज जैसी अजेय टीम को हराकर विश्व कप जीता. कपिल को टीम इंडिया का पहला तेज गेंदबाज माना जाता है. गेंदबाजी में तो कपिल देव कहर बनकर टूटते ही थे, लेकिन उनकी तूफानी बैटिंग के भी क्रिकेट फैंस दीवाने थे.
महज़ 23 साल की उम्र में टीम इंडिया की कप्तानी संभालने वाले कपिल ने कहा, कप्तान की भूमिका बखूबी निभाई उनके लिए चुनौती थी क्युकी उनके सीनियर प्लेयर्स उनके नेतृत्व में खेल रहे थे । इसलिए वह समय कपिल देव के लिए काफी मुश्किल था। लेकिन उन्होंने एक बात ठान ली थी कि फील्ड पर वह कप्तान है और फील्ड के बाहर सभी सीनियर्स उनके कप्तान।” कपिल देव की ही कप्तानी में सबसे पहला गौरव मिला।

-भारत में आक्रमक क्रिकेट की शुरुआत सौरव गांगुली ने की जिन्होंने 2000 के दशक में टीम इंडिया के खेलने की मानसिकता पर काफी काम किया। सौरव गांगुली ऐसे कप्तान थे जिन्होंने अपनी टीम को विपक्षी की आंख में आंख डालकर मैच जीतना सिखाया। गांगुली से पहले भारतीय क्रिकेट टीम काफी रक्षात्मक क्रिकेट खेला करती थी और गांगुली के आने के बाद उनकी कप्तानी की तुलना पाकिस्तान के पूर्व महान कप्तानों में से एक इमरान खान से हुई। क्रिकेट में जब हम आंकड़ों की बात करते हैं तो वे पूरी तरह से सच्चाई नहीं बताते हैं क्योंकि अलग-अलग दौर में अलग ब्रांड का क्रिकेट खेला जाता है और अब T20 फॉर्मेट के आने के बाद समीकरण बहुत तेजी से बदले हैं। सौरव गांगुली के समय में T20 क्रिकेट नहीं हुआ करता था और उन्होंने अपने ज्यादातर मैच कप्तान के तौर पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय और टेस्ट मैच ही खेले हैं। जब सौरव गांगुली के ओवरऑल भारतीय कप्तान रिकॉर्ड की बात करते हैं तो उन्होंने 196 मुकाबलों में कप्तानी की है जिसमें 97 मुकाबलों में जीतने में वे कामयाब रहे जबकि 79 मैच भारत उनकी कप्तानी में हरा। यह एक ओवरऑल रिकॉर्ड है जिसमें टेस्ट मैच भी शामिल है ऐसे में 15 मुकाबले ड्रा भी रहे। गांगुली ने जब सबसे बेहतरीन टीम ऑस्ट्रेलिया को 2001 में हराया और कप्तानी का दम उन्होंने पूरे विश्व में रौशन किया । गांगुली का जीत का प्रतिशत 49.48 रहा जो काफी कम है। गांगुली जब कप्तान थे तब आईसीसी का केवल एक ही विश्वकप होता था जो कि 50 ओवर के क्रिकेट का था और भारत गांगुली की कप्तानी में यह नहीं जीत पाया। लेकिन दादा के नाम एक आईसीसी ट्रॉफी जरूर है जो 2002 में भारत ने संयुक्त विजेता के तौर पर जीती थी।

-एमएस धोनी भारतीय क्रिकेट एवं विश्व के सबसे सफलतम कप्तानों में से एक है। उन्होंने अपने कप्तानी के दौरान भारत को हर आई सी सी ट्रॉफी जीतवाई है। 2007 में सबसे पहला टी -20 विश्व कप की कप्तानी उनपर सौपा गया। और उन्होंने अपने पहले ही टी -20 विश्व कप जीताया। 28 साल बाद धोनी ने भारत को फिर से विश्व विजेता बनाया। 2013 में उन्होंने भारत को आई सी डी चैम्पियन्स ट्रॉफी जीतवाई।भारत के लिए कप्तान के तौर पर सबसे ज्यादा 332 मुकाबले खेले। इसमें उन्होंने 178 मैचों में जीत हासिल की 120 मैचों में हार मिली , कुल मिलाकर धोनी का जीत प्रतिशत 53.1 प्रतिशत रहा जो कि इतने अधिक मैचों में कप्तानी के बाद बहुत अच्छा माना जाएगा। धोनी के कप्तानी काल की सबसे बड़ी खास बात उनके नाम दर्ज आईसीसी की तीनों ट्रॉफियां हैं। तब वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप नहीं होती थी और भारत ने धोनी की कमान में 2008 में टी-20 विश्व कप जीता फिर 2011 में 50 ओवर का विश्व कप विजेता बना। इन दो विश्व कप के अलावा एक चैंपियंस ट्रॉफी भी धोनी के नाम रही।
धोनी ने अपने अधिकांश खिलाड़ी सौरव गांगुली की टीम से लिए थे। सौरव गांगुली ने जिन खिलाड़ियों और कल्चर को तैयार किया वह आगे महेंद्र सिंह धोनी के लिए काफी कारगर साबित हुआ और भारत में जो आक्रमक क्रिकेट का ब्रांड स्टार्ट हुआ था वह धोनी की कप्तानी में भी बखूबी जारी रहा। हम कह सकते हैं कि गांगुली ने भारतीय टीम के लिए आधार तैयार किया जिस पर धोनी ने एक बड़ी इमारत खड़ी की।

–बात करे अब रन मशीन कहे जाने वाले विराट कोहली की तो इनका रिकॉर्ड काफी शानदार है. विराट कोहली ने टीम इंडिया की कमान 68 टेस्ट मुकाबलों में संभाली है, जिसमें से उन्होंने 40 टेस्ट में जीत हासिल की है और 17 टेस्ट हारे हैं. विराट के अलावा किसी भी भारतीय कप्तान ने इतने टेस्ट मुकाबले नहीं जीते हैं, यह किसी भी भारतीय कप्तान का यह रिकॉर्ड है. दूसरे नंबर पर 60 टेस्ट में 27 टेस्ट जीत के साथ महेंद्र सिंह धोनी हैं, बाद में सौरव गांगुली 49 टेस्ट में 21 जीत के साथ तीसरे नंबर पर हैं.
वनडे में भारत के बेस्ट कैप्टन रहे कोहली 19 में से 15 सीरीज जीतीं, 21 शतक जड़े।
टीम इंडिया ने विराट कोहली की कप्तानी में पिछले 7 सालों में शानदार खेल दिखाया है. विराट कोहली के नेतृत्व में मौजूद गेंदबाजी को पूरा विश्व दीवाना है. विराट कोहली की बतौर टेस्ट कप्तान सफलता के पीछे कोच रवि शास्त्री का भी बड़ा योगदान है. दोनों ने विश्व कप 2015 के बाद मिलकर एक नई टेस्ट टीम को मौका दिया जिसने पूरी दुनिया में अपना नाम रौशन किया .
भारत में कोहली जैसा जीत प्रतिशत किसी का नहीं
कोहली का जीत प्रतिशत 70.43 का रहा है। ये 10 मैच से ज्यादा भारत के लिए कप्तानी करने वाले किसी भी कप्तान का सबसे शानदार जीत प्रतिशत है। टीम इंडिया के लिए कोहली ने 95 मैच में कप्तानी की है और 65 मैचों में भारत को जीत मिली है।
कोहली की कप्तानी में भारत ने 2013 में वेस्टइंडीज में आयोजित ट्राई नेशन सीरीज अपने नाम की थी जबकि साल 2017 में चैंपियंस ट्रॉफी में टीम उप विजेता रही थी वहीं साल 2019 के वर्ल्ड कप में भारत सेमीफाइनल तक का सफर तय करने में सफल रहा था।
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आपके हिसाब से अबतक भारत के सबसे सफल कप्तान कौन रहे और क्यों ? अपने राइ हूयमर कमेंट बताये ????

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