कौन हैं Draupadi Murmu? गरीबी, डीप्रेशन से उठकर कैसे पार की चुनौतियां

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भारत में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं. सत्ताधारी पार्टी NDA ने आदिवासी चेहरा पर दांव खेलते हुए Draupadi Murmu को अपना उम्मीदवार बनाया है. बिपक्ष ने भूतपूर्व मंत्री और आईएएस अधिकारी यशवंत सिन्हा का नाम आगे किया है

भारत में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं. सत्ताधारी पार्टी NDA ने आदिवासी चेहरा पर दांव खेलते हुए Draupadi Murmu को अपना उम्मीदवार बनाया है. बिपक्ष ने भूतपूर्व मंत्री और आईएएस अधिकारी यशवंत सिन्हा का नाम आगे किया है.

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ऐसे में Draupadi Murmu एक मजबूत शख्सियत के रूप में उभर रहीं हैं. उन्हें NDA से समर्थन तो मिलना लाजमी है लेकिन विपक्ष भी Draupadi Murmu से मुँह नहीं मोड़ रहा है. Draupadi Murmu की राजनितिक छाप बेहद साफ़ है.

64 साल की Draupadi Murmu झारखंड की पहली महिला राज्यपाल हैं. वो 18 मई 2015 से झारखण्ड की राज्यपाल हैं. अगर 2022 राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों में Draupadi Murmu बहुमत हासिल करती हैं, तो देश के इतिहास में इनका नाम दूसरी महिला राष्ट्रपति के नाम दर्ज हो जायेगा.

Draupadi Murmu : सब कुछ गवां कर भी बनेगी राष्ट्रपति! Draupadi Murmu life Story

शिव भक्त हैं द्रौपदी मुर्मू

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एनडीए की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार Draupadi Murmu के बारे में बताया जाता है कि वो बहुत बड़ी शिव भक्त भी हैं. उनकी महादेव के प्रति आराधना कई बार देखा गया है.

द्रौपदी मुर्मू

जहाँ हाल हीं में 22 जून को ओडिशा के मयूरभंज में रायरंगपुर जगन्नाथ मंदिर में पूजा अर्चना की थी. यहीं नहीं उन्होंने यहां मंदिर परिसर में झाड़ू भी लगाई. इसके बाद उन्होंने शिव मंदिर में पूजा अर्चना की. इतना ही नहीं मुर्मू आदिवासी पूजा स्थल जहिरा (Jahira) भी पहुंचीं. 

शिव भक्त द्रौपदी मुर्मू

गरीबी से भरा संघर्ष

एक साधारण से व्यक्तित्व वाली Draupadi Murmu का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के बैदापोसी गांव में हुआ था. उनके पिता का नाम बिरंची नारायण टुडू हैं. NDA की राष्ट्रपति उम्मीदवार Draupadi Murmu संथाल परिवार से ताल्लुक रखती हैं.

राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्रपति नामांकन

बचपन से हीं Draupadi Murmu के अंदर कुछ कर गुजरने की क्षमता थी. परिवार ने पहले हीं अपनी नन्ही Draupadi के अंदर कुछ कर गुजरने का जूनून देख लिया था. उनका बचपन बेहद अभाव और गरीबी में बीता था. लेकिन अपनी स्थिति को उन्होंने अपनी मेहनत के आड़े नहीं आने दिया.

शिक्षा

माता-पिता के द्वारा Draupadi Murmu का एडमिशन इनके इलाके के ही एक विद्यालय में करवा दिया गया, जहां पर इन्होंने अपनी शुरूआती प्रारंभिक पढ़ाई को पूरा किया.

यहां प्रारंभिक शिक्षा के बाद ग्रेजुएशन की पढ़ाई करने के लिए Draupadi Murmu ने भुवनेश्वर शहर की ओर रुख मोड़ लिया. जहाँ उन्होंने रामा देवी महिला कॉलेज में एडमिशन प्राप्त किया और रामा देवी महिला कॉलेज से ही इन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई कंप्लीट की.

राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू

यहां Draupadi Murmu का अबतक राजनीति से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं था, यहां स्नातक करने के बाद अपनी काबिलियत के दम पर द्रौपदी मुर्मू को ओडिशा गवर्नमेंट में बिजली डिपार्टमेंट में जूनियर असिस्टेंट के तौर पर उन्हें नौकरी मिली. साल 1979 से लेकर के साल 1983 तक उन्होंने यहां अपनी नौकरी की. इसके बाद इन्होंने साल 1994 से 1997 तक रायरंगपुर में मौजूद अरबिंदो इंटीग्रल एजुकेशन सेंटर में टीचर के तौर पर काम करना शुरू किया.

दो बेटों और पति खोने के बाद डीप्रेशन से जूझना

यहां संघर्ष और चुनौती Draupadi Murmu के जीवन में अभी और भी बाकी थी. यहां Draupadi Murmu के व्यक्तित्व से हर कोई प्रभावित होता था लेकिन एक महिला होते हुये उन्हें कई तरीके की तानों को झेलना पड़ा. इन्होने कभी भी किसी की परवाह नहीं की. लक्ष्य को हमेशा अपनी ज़िंदगी में सबसे पहले अहमियत देती रहीं.

राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू कि बेटी इतिश्री मुर्मू

यहां ओडिशा की बिटिया Draupadi Murmu की शादी श्याम चरण मुर्मू के साथ हुई, उनके पति बैंक ऑफ इंडिया में काम किया करते थे. सबकुछ अच्छा चल रहा था. दोनों की 3 संतानें हुई, जिनमें दो बेटे और एक बेटी हुईं.

द्रौपदी मुर्मू के दो बेटों की मृत्यु हो गई और फ़िलहाल उनकी बेटी उनके साथ हैं

एक सुखी संसार के रूप में हर एक महिला के लिए ये एक अहम् सुख था. सबकुछ अच्छा चल रहा था, Draupadi Murmu की ताकत उनका पूरा परिवार था. लेकिन उनके जीवन में बड़ा तूफ़ान आया साल 2009 में जब उनके सुखी संसार में आग लग गई, यहां उनके बड़े बेटे की एक रोड एक्सीडेंट जब उनकी मौत हो गई. ये हिला देने वाली घटना ने Draupadi Murmu को अंदर तक तोड़ दिया था. नौजवान बेटा जिसकी उम्र सिर्फ 25 वर्ष थी. ये सदमा झेलना उनके लिए बेहद भयावह था.

द्रौपदी मुर्मू

अभी ये तकलीफ यहीं खत्म नहीं हुई आगे साल 2013 में उनके दूसरे बेटे की भी मृत्यु हो गई. और ठीक एक साल बाद यानी 2014 में उनके पति का भी देहांत हो गया.

Draupadi Murmu के जीवन में अँधेरा सा छा गया. उनके पास उनके जीवन का एक मात्र साहरा उनकी बिटिया इतिश्री मुर्मू बानी जिसकी शादी द्रौपदी मुर्मू ने गणेश हेम्ब्रम के व्यक्ति के साथ हुई.

ब्रहमकुमार सुशांत के मुताबिक द्रौपदी मुर्मू ब्रह्माकुमारी संस्थान से जुड़ीं

Draupadi Murmu के दोनों बेटों की असमय मौत के कारण वह एक समय टूट चुकी थी. उन्हें डीप्रेशन से भी गुजरना पड़ा जिसके लिए वो लगातार माउंट आबू स्थित ब्रहमकुमारी संस्थान जाती रहीं. बहुत कोशिशों के बाद वो सदमे से उभर पाईं.

जमीन दान और स्मृति स्थल

यहां पति और दो बेटों की मौत के बाद द्रौपदी मुर्मू ने अपने ससुराल पहाड़पुर की सारी जमीन ट्रस्ट बनाकर स्कूल के नाम कर दी. ट्रस्ट का नाम पति और बेटों के नाम पर एसएलएस ट्रस्ट रखा.

जहां चार एकड़ में फैला यह स्कूल रेसिडेंसियल है और इसमें कक्षा छह से दसवीं तक की पढ़ाई होती है.

अपने पति और दो बेटों को खोने के बाद द्रौपदी मुर्मू ने अपने जमीन का दान कर दिया

स्कूल के आगे में द्रौपदी मुर्मू व उनके दो बेटों की याद में बना स्मृति स्थल है, जहां तीनों की प्रतिमाएं लगी हुई है. फिलहाल इस स्कूल में 70 छात्र व छह शिक्षक हैं.

स्मृति स्थल

राष्ट्रपति उम्मीदवार कि राजनीतिक सफर

संथाल आदिवासी से ताल्लुक रखने वाली बहादुर Draupadi Murmu ने खुद को फिर समाज कल्याण में झोक दिया. जहाँ साल 1997 के समय वो ओडिशा के रायरंगपुर जिले से पहली बार इन्हें जिला पार्षद चुना गया, इसके साथ हीं यह रायरंगपुर की उपाध्यक्ष भी बनी.

द्रौपदी मुर्मू

राजनितिक सफर पर निकली Draupadi Murmu उड़ीसा गवर्नमेंट में राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के तौर पर साल 2000 से लेकर के साल 2004 तक ट्रांसपोर्ट और वाणिज्य डिपार्टमेंट का कारभार मिला. जहाँ उन्होंने बीजेपी-बीजेडी गठबंधन सरकार में साल 2002 से लेकर के साल 2004 तक उड़ीसा गवर्नमेंट के राज्य मंत्री के तौर पर पशुपालन और मत्स्य पालन डिपार्टमेंट को भी संभाला.

वहीँ 2002 से लेकर के 2009 तक द्रौपदी मुर्मू भारतीय जनता पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के मेंबर रहीं. यहां हमेशा आगे की ओर बढ़कर अपनी मजबूत छवि से लोगों को पास्ट करने वाली Draupadi Murmu भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एसटी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के पद को साल 2006 से लेकर के साल 2009 तक अपना समय दिया.

प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के साथ द्रौपदी मुर्मू

जिसके बाद एसटी मोर्चा के साथ ही साथ वो भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के मेंबर के पद पर यह साल 2013 से लेकर के साल 2015 तक रही.

बता दें कि झारखंड राज्य के बनने के पश्चात 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाली Draupadi Murmu पहली महिला राज्यपाल है. द्रौपदी मुर्मू झारखंड की पहली आदिवासी महिला राज्यपाल हैं. द्रौपदी मुर्मू 18 मई 2015 से झारखण्ड की राज्यपाल हैं.

NDA की राष्ट्रपति उम्मीदवार Draupadi Murmu

आज Draupadi Murmu का नाम हर किसी की जुबान पर चढ़ा हुआ है, इसके साथ हीं उनके संघर्ष की कहानी जहाँ किसी को रुला रही है तो किसी को जीवन जीने का एक अलग मकसद दे रही है.

वाकई अगर NDA की राष्ट्रपति उम्मीदवार Draupadi Murmu राष्ट्रपति का चुनाव जीत जाती हैं तो भारत में उनके नाम का एक अलग इतिहास लिखा जाएगा. एक छोटे से इलाके से आने वाली एक आदिवासी महिला आज राष्ट्रपति की उम्मीदवार हैं ये अपने आप में एक गौरव की बात है.

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