सूर्य मिशन पर ‘PAPA’ भी हुए रवाना, जानें आदित्य-L1 में किस रॉकेट का किया गया इस्तेमाल

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आदित्य-L1 में PSLV-XL रॉकेट को चुना गया है. जिसने ISRO के कई मिशन में सबसे अहम भूमिका निभाई है. सूर्य की स्टडी के लिए आदित्य-L1 अपने साथ 7 पेलोड लेकर जा रहा है

चंद्रयान-3 (Chandrayan-3) की सफल लॉन्चिंग कर इतिहास रचने वाला इसरो अब सूर्य मिशन पर निकल गया है. भारत का पहला सूर्य मिशन आदित्य-L1 सूर्य पर अध्ययन करेगा. बता दें कि आदित्य-L1 को आँध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से 2 सितंबर सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर लांच किया गया है. आदित्य-L1 में PSLV-XL रॉकेट को चुना गया है. जिसने इसरो के कई मिशन में सबसे अहम भूमिका निभाई है. सूर्य की स्टडी के लिए आदित्य-L1 अपने साथ 7 पेलोड यानी आधुनिक उपकरण लेकर जा रहा है. इसमें सबसे ज्यादा चर्चा ‘PAPA’ का है.

क्या है ‘PAPA’?

पृथ्वी से सूरज दूरी 14 करोड़ 96 लाख किलोमीटर है. सूर्य को बारीकी से अध्ययन करने के लिए आदित्य-L1 के साथ जो 7 पेलोड जा रहे हैं, उनके जरिए इसरो कई कामयाबी हासिल कर सकता है. भारत की अंतरिक्ष भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा भेजे गए पेलोड का मकसद इनके जरिए फोटोस्फेयर, क्रोमोस्फेयर और सूरज की सबसे बाहरी परतों की स्टडी करना है. इन पेलोड में से एक पेलोड है ‘PAPA’. इसका मतलब है ‘प्लाज्मा एनालाइजर पैकेज फॉर आदित्य’. यह सूर्य से निकलने वाले गर्म हवाओं में मौजूद इलेक्ट्रॉन्स और भारी आयन की दिशाओं पर अध्ययन करेगा. इसके अलावा चार्ज्ड कानों जैसे आयन्स के वजन का भी आकलन करेगा.

क्या है PSLV-XL रॉकेट?

सूर्य की स्टडी के लिए जिस आदित्य-L1 को लांच किया गया. यह भारत का पहला सूर्य मिशन है. आदित्य-L1 में PSLV-XL रॉकेट को चुना गया है जिसका इंजन सबसे ताकतवर बताया जाता है. बता दें कि इस रॉकेट की ये 59वीं और एक्सएल वैरिएंट की 25 वीं उड़ान है. इसकी खासियत ये है की ISRO द्वारा ज्यादातर सफल लॉन्चिंग में PSLV रॉकेट हीं इस्तेमाल हुए हैं. आदित्य-L1 को PSLV_XL रॉकेट से अंतरिक्ष में छोड़ेगा. ऐसे में आपको बता दें की आदित्य L1 से लांच के 63 मिनट बाद इसका स्पेसक्राफ्ट अलग हो जायेगा.

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