महिलाओं में कब होती है Sex की ज्यादा इक्षा?

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Nisha
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Sex ऐसा प्रोसेस है जो ह्यूमन के होर्मोनेस के हिसाब से कण्ट्रोल होती है, उसके लिए ज़िम्मेदार ना तो कोई इंसान होता है ना ही कोई समय. वहीँ महिलाओं में खास कर ओर्गास्म को लेकर कई सवाल उठते हैं,क्यूंकि female body में सेक्स होर्मोनेस एक्टिव होने में बहुत delay करते हैं. वहीँ दूसरी तरह कुछ वक़्त ऐसा होता है जब महिलाएं साफ़ तौर से सेक्स से इंकार कर देती हैं,या उनके डिज़ायर में कमी देखि जाती है और कहीं न कहीं ये प्रॉब्लम किसी भी रिश्ते को भी ख़राब कर देती है.

दरअसल,औरतों की बनावट और संरचना पुरुषों से बहुत अलग होती है. महिलाओं के बॉडी में होर्मोनेस नैचुरली ही चेंज होते हैं. जिसके कारण कभी वो इस से भगति है तो कभी उनकी डिजायर सेक्स को लेकर बढ़ जाती है.आज हम इसी टॉपिक के ही बारे में बताएंगे की वो कौन कौन सा वक़्त होता है जब महिलाओं में सबसे ज्यादा सेक्स हॉर्मोन हाई पर है?

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पहले तो आपको बता दें की इस आर्टिकल में दी जा रही जानकारी गाइनोकॉलेजिस्ट के रिपोर्ट के अनुसार है.

ovulation period में। …

ovulation पीरियड को सेक्स वांट के लिहाज़ से सबसे बेहतर माना जाता है,क्यूंकि इसी समय लड़कियों में होर्मोनेस ज्यादा एक्टिव होते हैं. फीमेल बॉडी में एस्ट्रोजन पीक पे होता है. साथ ही इसी वक़्त प्रोजेस्ट्रोन भी अधिक होता है,जिसके कारण महिलाओं में सेक्स की डिजायर अधिक बढ़ जाती है. सबसे दिलचस्प बात ये होती है की ovulation के ही दौरान महिलाएं या लडकियां पुरुष के तरफ यानि की अपोजिट जेंडर की ओर ज्यादा attract होती हैं और अपने आपन उनके शरीर में फेरोमेन्स(pheromones) बनने लगता है.

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periods के दौरान….

ये लाज़मी है की इस बात को पढ़ कर आपको हैरानी हो,लेकिन ये तथ्य बहुत कम ही लोगों को पता है की पीरियड्स के टाइम सेक्स वांट बढ़ जाती है. दरअसल, इस वक़्त पर होर्मोनेस का बैलेंस बहुत तेज़ी से बदल रहा होता है. और अगर कोई कपल बच्चे की सोच रहे हों तो ये duration बिलकुल सटीक होती है. पीरियड्स के ही दौरान लुब्रिकेशन भी आसानी से होती है.

second trimester …..

प्रेगनेंसी के दूसरे ट्राइमेस्टर में महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन के स्तर में काफी अधिक बढ़ोतरी होती है और इसी वजह से उन्हें सेक्स की इच्छा होती है। हालांकि बहुत-सी महिलाएं इस बात को समझ नहीं पाती क्योंकि उन्हें इस दौरान बदनदर्द, मतली और थकान जैसी समस्याएं भी महसूस होती रहती हैं। वैसे दूसरी तिमाही में जहां डिज़ायर अधिक होती है वहीं थर्ड ट्राइमेस्टर में यह कम हो जाती है।

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