राष्ट्रपति भवन का निर्माण कब और किसने करवाया? जानें दिलचस्प इतिहास

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26 जनवरी 1950 को इसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की स्थाई संस्था के रूप में बदल दिया गया. और इसी राष्ट्रपति भवन में भारत की मौजूदा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रहती हैं

देश कि राजधानी दिल्ली में स्थित राष्ट्रपति भवन दूर से अलग और अनोखा दिख जाता है. सुंदरता कि छाप छोड़ती राष्ट्रपति भवन के पास जैसे जैसे नजदीकियां घटती है वो और भी खूबसूरत दिखने लगता है. 26 जनवरी 1950 को इसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की स्थाई संस्था के रूप में बदल दिया गया. और इसी राष्ट्रपति भवन में भारत की मौजूदा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रहती हैं.

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राष्ट्रपति को कब और किसने बनाया ?

राष्ट्रपति भवन दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के राष्ट्रपति का निवास स्थान है. पहले ये ब्रिटिश वायसराय का सरकारी आवास था. इसका निर्माण उस समय किया गया था, जब साल 1911 में तय हुआ कि भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली शिफ्ट किया जाएगा. साल 1950 में 26 जनवरी का वो दिन आया जब इसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की स्थाई संस्था का नाम मिल गया. बता दें कि राष्ट्रपति भवन का निर्माण वास्तुकार एडविन लैंडसीयर लुट्येन्स ने किया था.

राष्ट्रपति भवन में खर्च और समय

राष्ट्रपति भवन चार मंजिला है और इसमें 340 खूबसूरत कमरे बने हैं, जिसे काफी खूबसूरती से सजाया गया है. वहीँ राष्ट्रपति भवन में इमारत के अलावा मुगल गार्डन और कर्मचारियों का भी आवास है. राष्ट्रपति भवन का निर्माण वास्तुकार एडविन लैंडसीयर लुट्येन्स ने किया था. यह एक चार मंजिला भवन है. इस भवन के निर्माण में करीब 70 करोड़ ईंटों का इस्तेमाल हुआ है. राष्ट्रपति भवन में मुगल गार्डन और कर्मचारियों के रहने के लिए भी आवास हैं।वहीँ राष्ट्रपति भवन का रूप देने में 17 साल का लम्बा वक़्त लगा था.

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