क्यों भटकती है आत्मा, क्या है अनसुलझा रहस्य… जान लें ये बातें !

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Nisha
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भगवद गीता में साफ़ साफ़ शब्दों में बताया गया है की आत्मा अमर और अविनाशी है… जिसे ना तो आग जला सकता है,ना तो पानी गला सकती है और ना हवा खुद में सोख सकती है बल्कि ये एक ऐसी काया है जो कर्मों के फल के हिसाब से शरीर बदला करती है… ये एक ऐसा रहस्य है जिसे जितना सुलझाने की कोशिश की गयी है ये उतना उलझता गया है. आज हम आपको आत्मा से जुडी कुछ रोचक बातें बताने जा रहे हैं… जो आपको कम डराएंगी लेकिन हैरान ज्यादा करेंगी…

आखिर आत्मा का आकार क्या है..
ये बात अक्सर आपके मन को भी झकझोर देती होंगी की आखिर आत्मा होती कैसी है,किस आकार की होती है लेकिन आपको बता दें की… कठोपनिषद एवं गरुड़ पुराण मे बताया गया है कि आत्मा अंगूठे के आकार का होता है।

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आत्मा क्या कर सकती है…
आत्मा वैसे तो हमारे शरीर के अंदर ही होती है… लेकिन आत्मा के पास आंख,कान नहीं है…फिर भी वो हमें देख सकती है,सुन सकती है,महसूस कर सकती है..

आत्मा किस रंग का होता है..
ये बात वाकई रोचक है…क्यूंकि अक्सर फिल्मों या शोज में भूतों को आत्मा बना कर सफ़ेद या तो काले रंग में दिखाया जाता है लेकिन ऐसा नहीं है…बल्कि ऋषि मुनियों के शोध से लेकर ज्ञानी और प्रोफेसरों के अध्ययन के अनुसार आत्मा का रंग नीला या तो आसमानी के आस पास का होता है.

क्यों भटकती है आत्मा…
दरअसल,ऐसा कहा जाता है की आत्मा कर्मों का फल भोग रही होती है,कुछ आत्माओं की इक्षा मनुष्य शरीर में रहने के बावजूद अधूरी रह जाती है जिसे पूरा करने के लिए मरने के बाद भी किसी दूसरे शरीर का सहारा लेकर उसे पूरा करती है और जब तक ऐसा नहीं हो पाता वो भटकी रहती है.

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