UN ने कि गिरफ्तार Mohmmad Zubair कि वकालत, पत्रकार पर लगा है धार्मिक भावना आहात करने का आरोप

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“पत्रकार मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी से भारत में प्रेस की स्वतंत्रता का स्तर और नीचे चला गया है. सरकार ने सांप्रदायिक मुद्दों से जुड़ी खबरें प्रकाशित करने वाले प्रेस के सदस्यों के लिए एक असुरक्षित शत्रुतापूर्ण माहौल बना दिया है

भारत विश्वस्तर पर बहुत मजबूती से आगे बढ़ रहा है, लेकिन कई विदेशी ताकतें लगातार भारत पर प्रहार करने की कोशिश कर रहे हैं. भारत को बदनाम करने की साजिशें हर बार की जाती रही है.
आपको याद दिला दें कि पैग़म्बर मोहम्मद पर तथाकथित आप्पतिजनक टिपण्णी का बवाल उठा था, जो फिलहाल तक चल रहा है.

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कहा गया कि नूपुर शर्मा ने पैग़म्बर मोहम्मद का अपमान किया, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पार्टी की प्रवक्ता नूपुर शर्मा को पार्टी से निकाल दिया. इसके बाद खुद महिला प्रवक्ता ने हर किसी से माफ़ी भी मांगी. लेकिन यहां ये मामला उठता चला गया और लगातार भारत को बदनाम करने की कोशिशें चलती रही.

इस बिच जो अहम् मुद्दा है वो ये कि भारत के आतंरिक मामलों में दूसरे देशों को आने की क्या जरुरत पद सकती है. तो इसका जवाब राजनितिक विशेषज्ञों की तरफ यही आता है कि ये गिने चुने लोग भारत कि तर्रकी और विश्वस्तर पर अच्छी छवि को पचा नहीं पा रहे हैं.

नूपुर शर्मा के विवाद के बाद अंतरास्ट्रीय मंचों ने एक और बचकानी रास्ते को पकड़ा है. दरअसल, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के एक प्रवक्ता ने भारत में ऑल्ट न्यूज के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी पर हंस्तक्षेप किया है.

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यहां आपको बता दें कि मोहम्मद ज़ुबैर के खिलाफ हिन्दू धर्म के लोगों की भावना को आहात पहुंचाने का आरोप लगा है. और ऐसा कई बार हुआ है कि मोहम्मद ज़ुबैर पर ऐसे कई और आरोप लगें हैं. सीधे तौर पर कहें तो पत्रकार ज़ुबैर हिन्दू देवी देवताओं पर विवादित टिपण्णी को लेकर कई बार घिरें भी हैं. फिलहाल उनकी गिरफ़्तारी उनके साल 2018 में एक ट्वीट में कथित तौर पर एक समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के मामलें में हुई है.

वैसे तो ये भारत का आंतरिक मसला है लेकिन संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के एक प्रवक्ता ने भारत में ऑल्ट न्यूज के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी का हवाला देते हुए कहा है कि पत्रकार “जो कुछ भी लिखते हैं, ट्वीट करते हैं या कहते हैं” उसके लिए उन्हें जेल नहीं भेजा जाना चाहिए.

प्रवक्ता ने कहा कि यह आवश्यक है कि लोगों को निडर होकर अपनी बात कहने की अनुमति दी जाए. जुबैर को एक हिन्दू देवता के बारे में 2018 में किये गए एक आपत्तिजनक ट्वीट के मामले में सोमवार को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था.

दरअसल हुआ ये कि पाकिस्तान के एक पत्रकार ने जुबैर की रिहाई का आह्वान पर सवाल किया, इसके जवाब में दुजारिक ने कहा, “पत्रकार जो कुछ भी कहते हैं, लिखते हैं या ट्वीट करते हैं इसके लिए उन्हें जेल नहीं भेजा जाना चाहिए। यह दुनिया में हर जगह लागू होता है.”

जब्कि वाशिंगटन में सीपीजे के एशिया कार्यक्रम समन्वयक स्टीवन बटलर ने कहा, “पत्रकार मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी से भारत में प्रेस की स्वतंत्रता का स्तर और नीचे चला गया है. सरकार ने सांप्रदायिक मुद्दों से जुड़ी खबरें प्रकाशित करने वाले प्रेस के सदस्यों के लिए एक असुरक्षित शत्रुतापूर्ण माहौल बना दिया है.”

उन्होंने कहा, “अधिकारियों को तत्काल और बिना किसी शर्त के जुबैर को रिहा करना चाहिए और उन्हें बिना किसी दखलंदाजी के अपनी पत्रकारिता करने देना चाहिए.”

इस बीच, एक गैर सरकारी संगठन ‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ (सीपीजे) ने भी जुबैर की गिरफ्तारी की निंदा की है.

अब यहां जिस तरीके से भारत के पत्रकार ज़ुबैर के केस में अन्तराष्ट्रीय मंच को अपनी टिपण्णी देने की जरुरत पड़ी तो सवाल यहां ये है कि भारत के ताजा मामलें जहाँ उदयपुर में एक हिन्दू दर्जी कि दो मुस्लिम आरोपियों ने गला काट कर हत्या कर दी उसपर मौन क्यूं है?

यहां बता दें कि एमनेस्टी इंडिया के अध्यक्ष आकार पटेल ने बयान में कहा कि भारतीय अधिकारी जुबैर पर इसलिए निशाना साध रहे हैं क्योंकि वह फर्जी खबरों और भ्रामक सूचनाओं के खिलाफ काम कर रहे हैं.

बता दें कि सोमवार की शाम गिरफ्तार मोहम्मद जुबैर को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार को चार दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दी है. जहाँ पुलिस हर एक एंगल से जांच करने में जुटी हुई है.

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