अट्रैक्शन कितने तरह के होते हैं !

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Nisha
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किसी को पसंद करना और किसी के तरफ अट्रैक्ट होना क्या दोनों सिमिलर है,ये सवाल आपके दिमाग हो नहीं….लेकिन इसका जवाब आप भी जानना चाहेंगे…. जी हां ये दोनों ही टर्म्स बिलकुल अलग है… दरअसल,जब हम किसी को पसंद करते हैं तो उसके अपियरेन्स और लुक के साथ साथ उसके व्यक्तित्व को भी पसंद करने लगते हैं,साथ ही उस शख्स का आपके पास होना आपको बेहतर और सिक्योर फील करता है…. लेकिन वहीँ अट्रैक्शन में आपको सिर्फ उनके कुछ फीचर्स अपनी ओर आकर्षित करते हैं… जैसे की उनका लुक,उनका बोलना,उनका अंदाज़ हर कुछ,लेकिन वो सिर्फ तब होगा जब जब वो आपके सामने या आस पास होते हैं…

अट्रैक्शन दो तरह के होते हैं प्राइमरी और सेकेंडरी…

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प्राइमरी आकर्षण में आप किसी के लुक्स से आकर्षित होते हैं और सैकेंडरी आकर्षण में आप किसी के व्यक्तित्व से प्रभावित होते हैं.

जब आप के दिल में किसी के लिए फीलिंग्स पैदा होने लगती हैं, विशेषरूप से सैक्सुअल फीलिंग, तो आप दुविधा में पड़ जाते हैं, क्योंकि आप उतने सैक्सुअल पर्सन नहीं हैं. आप नहीं जानते कि इन फीलिंग्स पर क्या प्रतिक्रिया दें या उस व्यक्ति से कैसे शारीरिक कनैक्शन बनाएं.

लोगों का आप के प्रति नजरिया

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लोगों का क्या है आपके प्रति नजरिया….
अपने एहसासों को छुपाना सबसे बड़ी गलती है,जो फील करें उसे एक्सप्रेस करना भी उतना ही जरुरी है,जितना की डिनर के बाद डेजर्ट. ये चॉइस नहीं जरुरी होता है…. लोगों की राय अलग अलग हो सकती है लेकिन उनकी राय आपको प्रभावित नहीं करनी चाहिए… साथ ही आपके हो रहे इंटरनल बदलाव को सिर्फ आप महसूस कर सकते हैं इसलिए बाकि क्या सोचते या कहते हैं उस हिसाब से नहीं बल्कि अपने विश लिस्ट के अनुसार चले….

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