स्कूल प्रशासन ने ईसाई धर्म अपनाने के लिए छात्रा के साथ किया अमानवीय व्यहवहार, बच्ची ने की आत्महत्या

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मेरा नाम लावण्या है. उन्होंने (स्कूल) मेरे माता-पिता से मेरी उपस्थिति में पूछा था कि क्या वे मुझे ईसाई धर्म में परिवर्तित कर सकते हैं और आगे की पढ़ाई के लिए मदद कर सकते हैं. चूँकि मैंने नहीं माना, वे मुझे डाँटते रहे”

देश में बीते कुछ सालो में जबरदस्ती धर्मान्तरण के मामले सामने निकल कर आ रहे हैं, जहाँ उत्तरप्रदेश में इसके खिलाफ प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी कानून व्यवस्था को ऐसे मामले पर सख्त कार्यवाई करने के आदेश पहले ही जारी कर दिए थे. जिसके बाद कई ऐसे रैकेट का खुलासा हुआ जहाँ बड़े और नमी मौलाना को भी गिरफ्त में लिया गया. ऐसे मामले देश के कई राज्यों और इलाको से भी आये, अभी हाल ही में एक शिक्षा संस्थान जहाँ बच्चों के लिए मंदिर माने जाने वाले तमिलनाडु के तंजावुर में सेक्रेड हार्ट हायर सेकेंडरी स्कूल, तिरुकट्टुपाली में एक बच्ची को जबरदस्ती ईसाई धर्म मनवाने के लिए मजबूर किया गया, मामला इस हद तक गया की बच्ची ने आत्महत्या कर ली. जी हाँ यहां कक्षा 12 वीं में पढ़ने वाली एम लावण्या नाम की एक छात्रा ने स्कूल प्रशासन की कथित प्रतारणा के बिच अपनी जान देना बेहतर समझा , जो बेहद दुखदाई है. एक तरफ देश तर्रकी के रास्तो में बढ़ रहा जहाँ जाती धर्म को एक रूप में सामान अधिकार दिया गया है लेकिन ऐसे खुशहाल और बेहतरीन परिस्थितियों में भी कई ऐसे लोग हैं, जो देश की छवि पर बड़ा प्रहार कर रहे हैं और वजह है सिर्फ धर्म. बता दे की आत्महत्या करने वाली छात्र लावण्या पिछले पाँच वर्षों से सेंट माइकल गर्ल्स हॉस्टल में रह रही थीं जहाँ यह हॉस्टल उसके स्कूल के नजदीक ही स्थित है.

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बच्ची का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जहाँ बिटिया धर्मानतरण के ऊपर स्कूल की पोल खोलती नजर आई जहाँ छात्र ने बताया की कैसे उसके साथ अमानवीय व्यहवहार किया गया. यहां आपको बता दे की छात्र स्कूल में आगे भी पढ़ना चाहती थी, जहाँ उसके कई सपने थे लेकिन वहां उसपर ईसाई धर्म को अपनाने के लिए आये दिन अधिकारियो द्वारा दबाब बनाया जाता है. जहाँ लावण्या उनके धर्म को अपनाने के लिए साफ़ इंकार करती रही और बच्ची ने साफ़ कहा की वो अपने धर्म को नहीं छोड़ेगी. लावण्या के विरोध के कारन स्कूल प्रशासन ने पोंगल समारोह के लिए उनकी छुट्टी का आवेदन को भी रद्द कर दिया था. जबकि यहां छात्रा छुट्टियों में अपने घर जाना चाहती थी, पर अधिकारी उससे बदला निकलने के लिए उसे स्कूल के शौचालयों की सफाई, खाना पकाने और बर्तन धोने जैसे काम करने के लिए मजबूर किया गया. कथित तौर पर प्रताड़ना से तंग आकर यहां सेक्रेड हार्ट हायर सेकेंडरी स्कूल की 12वीं की छात्रा लावण्या ने अपनी जीवन को समाप्त करने का फैसला ले लिया. यहां उसने स्कूल के बगीचे में इस्तेमाल किए गए कीटनाशकों का सेवन आत्महत्या करने के लिए किया.


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन सब में बीते 9 जनवरी की रात को छात्र को अचानक बेचैनी और लगातार उल्टी होने की समस्या होने लगी जिसके बाद आनन् फानन में लावण्या को अस्पताल ले जाया गया. हॉस्टल के वार्डन ने उसके माता-पिता को बुलाया और साथ ही अपने साथ ले जाने की बात कह डाली. इसके बाद लावण्या को तंजौर के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आईसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया. यहां डॉक्टर ने बताया था की छात्रा के लगभग 85 फीसदी फेफड़े में जहर पहुँच चुका था जिसकी वजह से आगे जाकर लावण्या ने 19 जनवरी,2022 को अस्पताल में अंतिम साँस ली.


यहां सोशल मीडिया में इसी मामले में एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जहाँ लावण्या बेहोशी की हालत में अपने साथ हुए टॉर्चर के बारे में जाहिर करते हुये सुनाई पर रही है मूल रूप से यह वीडियो तमिल में है, इसमें वो कहती नजर आई की “मेरा नाम लावण्या है. उन्होंने (स्कूल) मेरे माता-पिता से मेरी उपस्थिति में पूछा था कि क्या वे मुझे ईसाई धर्म में परिवर्तित कर सकते हैं और आगे की पढ़ाई के लिए मदद कर सकते हैं. चूँकि मैंने नहीं माना, वे मुझे डाँटते रहे.” लावण्या ने इस दौरान राचेल मैरी का भी नाम लिया जिसने कथित तौर पर उसे प्रताड़ना दी थी.

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आपकी जानकारी के लिए बता दे की पीड़ित लावण्या के परिजन 17 जनवरी को तिरुकट्टुपल्ली पुलिस थाने के समीप प्रदर्शन करने लगे और स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की माँग करने लगे. जहाँ उन्होंने आरोप लगाया कि हॉस्टल वार्डन सगयामरी ने उसे धर्म बदलने के लिए इस कदर मजबूर किया की बच्ची ने कीटनाशक खाकर आत्महत्या कर लिया. इस मामले की खबर फैलते ही विश्व हिंदू परिषद, हिंदू मुन्नानी और राजनीतिक संगठन इंदु मक्कल काची जैसे हिंदू संगठनों ने लावण्या को न्याय दिलाने और हिंदुओं के धर्मांतरण के खिलाफ एकजुट होकर विरोध करने आये. यहां विहिप के प्रदेश प्रवक्ता अरुमुगा कानी ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद तब तक चैन से नहीं बैठेगी जब तक लावण्या को न्याय नहीं मिल जाता, उसके साथ जो भी हुआ वो बेहद दर्दनाक है.

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बता दे की 19 जनवरी को तंजावुर जिला सचिव मुथुवेल के नेतृत्व में इस ममले में भूख हड़ताल किया गया. उन्होंने कहा, “हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों। तब तक हम विरोध करेंगे.” जबकि इंदु मक्कल काची के संस्थापक अर्जुन संपत ने अपने अधिकजारिक ट्विटर हैंडल से जानकारी साझा करते हुये बताया की लावण्या का निधन हो चूका है, जहाँ उन्होंने स्कूल प्रशासन पर कई गंभीर सवाल उठाए.

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