Single Life VS Married Life-Which One Is Better?

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Nisha
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हमें अक्सर दूसरों की ज़िन्दगी खुद से अच्छी लगती है,लेकिन हर किसी की ज़िन्दगी वैसी ही होती है जैसे की दूसरों की… ह्यूमन नेचर है की हम compare करते रहते हैं….
अकेले रहना और सिंगल होना दोनों ही अलग परिस्तिथियां है जिसे लोग हमेशा जोड़ देते हैं… लोग सोचते हैं की अगर कोई सिंगल है तो उसकी ज़िन्दगी में ख़ुशी नहीं है… अपने नहीं है,हमेशा उदास होगा लेकिन ऐसा होता नहीं है… वहीँ हम में से ज्यादा तर लोगों के हिसाब से जब तक शादी ना हो जाये इंसान अधूरा ही होता है….

लेकिन ऐसा वो समझते यहीं जो खुद को सही से नहीं समझ पाते….लेकिन शायद आपको पता हो की आज कल के लोग अपनी लाइफ अपने शर्तों पर जीता चाहते हैं जहाँ सिंगल होना वो खुद चुनते हैं… उनका मानना होता है की अपनी ज़िन्दगी ऐसे हाथों में देना जो शायद गकत हो उससे अच्छा है,सिंगल हो कर ही ज़िन्दगी जी ली जाए….

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वहीँ शादीशुदा शख्स भी अपने निजी ज़िन्दगी में उलझने के बाद सिंगल लाइफ को ही बेहतर बताता है,यहाँ तक की मैरेड लाइफ भी कोम्प्रोमाईज़ से भरने लगती है….

अगर एक इंसान जो हमेशा से ही किसी रिलेशनशिप में ना आया हो वो सिंगल होता है…. लेकिन अगर कोई शादीशुदा हो कर भी अलग हो वो अकेला होता है…. यानि की ये तो कन्फर्म है की अकेला होना और सिंगल होने में दोनों में फर्क है….

– वे लोग जो सदैव अविवाहित रहे हैं, वे अपने दोस्तों, परिवार और पड़ोसियों से ज्यादा विनीत और उदार पाए गए, उन के बजाय जो विवाहित हैं.

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– सिंगल लोगों के सिविक और्गनाइजेशंस के लिए वौलंटियर करने की संभावना ज्यादा होती है.

– पुरुषों पर की गई एक स्टडी के मुताबिक, विवाहित पुरुष वैसे काम कम करते हैं, जिन में मौद्रिक लाभ न छिपा हो.

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