PM मोदी के साथ प्रणव मुखर्जी के कैसे थे रिश्ते? बेटी शर्म‍िष्ठा मुखर्जी ने राहुल गांधी पर भी खोले राज 

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कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रणव मुखर्जी की बेटी शर्म‍िष्ठा मुखर्जी ने इस किताब में पीएम मोदी के साथ पिता के रिश्ते पर खुलासा किया है

प्रणब, ‘माय फादर ए डॉटर रिमेंबर्’ ये किताब इन दिनों खूब चर्चा में है। ये किताब पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी ने लिखी है. कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रणव मुखर्जी की बेटी शर्म‍िष्ठा मुखर्जी ने इस किताब में पीएम मोदी के साथ पिता के रिश्ते पर खुलासा किया है. इसके अलावा राहुल गांधी को लेकर पूर्व राष्ट्रपति क्या कहते और सोचते थे इसका भी जिक्र किया गया है.

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पीएम मोदी के गुणों से प्रभावित थे प्रणव दा

प्रणब मुखर्जी 2012 से लेकर 2017 तक भारत के राष्ट्रपति रहे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2014 में यानी प्रणव मुखर्जी के कार्यकाल के मध्य में ही प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी. किताब को लेकर अपने एक इंटरव्यू में शर्म‍िष्ठा मुखर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व राष्ट्रपति के रिश्ते काफी ‘विचित्र’ थे. पीएम मोदी जब भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे प्रणब मुखर्जी से मिलते, तो वह सम्मान में उनके पैर छूते. उनकी तरफ से ये सब खुलेपन और ईमानदारी के साथ किया जाता.

किताब में पीएम मोदी का जिक्र

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपनी पुस्तक में अपने पिता के साथ हुई बात-चीत और राजनीतिक दलों के नेताओं पर उनके विचार को साझा किया है. शर्मिष्ठा मुखर्जी ने बताया की बाबा (पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी) ने यह बात मुझसे कही कि उनकी राय में नरेंद्र मोदी इंदिरा गांधी के बाद एकमात्र ऐसे पीएम हैं जिनमें लोगों की नब्ज इतनी तीव्र और सटीक महसूस करने की क्षमता है.

पूर्व राष्ट्रपति ने डायरी में क्या लिखा?

शर्मिष्ठा मुखर्जी के मुताबिक पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने 23 अक्टूबर 2014 को अपनी डायरी में लिखा कि पीएम का फैसला कि वे सियाचिन में देश के जवानों और बाढ़ प्रभावितों के साथ दिवाली मनाएं, बहुत शानदार है. यहां पीएम मोदी की तुलना इंदिरा गांधी से करते हुए लिखा की, श्रीनगर में लोग उनकी राजनीतिक समझ के बारे में बात करते हैं जो कि वास्तव में थी, यह बात इंदिरा गांधी के अलावा किसी अन्य पीएम में नहीं दिखता है.

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राहुल गांधी पर क्या थे विचार?

शर्मिष्ठा मुखर्जी के मुताबिक प्रणव मुखर्जी ने इशारों में कहा है कि राहुल गांधी राजनीतिक रूप से अपरिपक्व हैं. वे किसी भी सलाह पर ध्यान नहीं देते. पूर्व राष्ट्रपति ने जिक्र किया कि राहुल गाँधी ने मेरी बातों को अनुसना कर दिया था जब मैंने राष्ट्रपति के तौर पर उनको एक सलाह दी थी. वे कई ऐसे मौकों पर बार-बार गायब हो जाते हैं जो नहीं होना चाहिए. गंभीर राजनीति 24×7 और 365 दिन का काम है.

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