केरल में इस्लामिक कट्टरवाद की सोच से परेशान हैं मुस्लिम, खौफ की वजह क्या?

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”मैं 10 सालों से ऊहापोह की स्थिति में थीं. इस्लाम को लेकर मेरे भीतर सवाल ही सवाल थे, जिसके चलते मैंने कुछ साल पहले पैगंबर मोहम्मद की बायोग्राफी पढ़ी. जैसे-जैसे मैं इस किताब को पढ़ती गई, मेरा इरादा पक्का होता गया. यहां उस किताब में दासता और औरतों को लेकर जो बातें लिखी गई हैं, वह मानवाधिकारों की धज्जियाँ उड़ाती है”

‘एक्स मुस्लिम्स ऑफ केरल’ (Ex-Muslim of Kerala), टाइटल से इतना तो समझ गए होंगे की ये एक इस्लामिक विचार के इर्द गिर्द है, हमारे खबर का उद्देश्य आपको इसके बारे में वो हर एक तथ्य रखना है जिससे आप केरल की स्थिति पर गौर करे. बीते दिनों मलयाली फिल्मोँ के सफल निर्देशक अली अकबर ने अपनी पत्नी लुसिम्मा के साथ इस्लाम छोड़कर हिन्दू धर्म को अपना लिया था, जहाँ उनका कहना था की इस्लाम में कट्टरवाद बढ़ता जा रहा है. मौजूदा समय में केरल में ‘एक्स मुस्लिम्स ऑफ केरल’ नाम के संगठन की जमकर चर्चा हो रही है, जहाँ दावों के अनुसार इस्लाम में कट्टरवादी बढ़ गई है इसलिए राज्य में करीबन 2000 मुस्लिमों ने इस्लाम को छोर दिया है. दरअसल ‘एक्स मुस्लिम्स ऑफ केरल’ नाम के संगठन है क्या आपको वो समझाते हैं, यहां इस संस्था का उद्देश्य इस्लाम छोड़ने वाले मुस्लिमों को सहायता प्रदान करना है साथ हीं उन लोगों को समर्थन देना है. इस संगठन के अध्यक्ष डॉक्टर आरिफ हुसैन थेरुवथ ने साफ़ तौर पर इसपर अपनी राय रखते हुये कहा “पिछले एक साल में केरल में रिकॉर्ड 300 लोग इस्लाम छोड़ चुके हैं. आँकड़ों से इतर बात करें तो करीब 2000 लोग हमारे संपर्क में हैं, जो इस्लाम छोड़ चुके हैं. ऐसे भी बहुत लोग होंगे जो हमारे संपर्क में नहीं आ पाए हैं.”

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जबकि डॉ. आरिफ आगे कहते हैं, “लोग इसलिए अपनी पहचान छिपाकर रखते हैं, क्योंकि समाज ऐसे लोगों को काफिर (नास्तिक) और अनैतिक करार दे देती है। यही नहीं, उस शख्स का बहिष्कार किया जाता है. उसके प्रॉपर्टी समेत तमाम तरह के अधिकार उससे छीन लिए जाते हैं. शारीरिक, सामाजिक और मानसिक हर तरह से उसे प्रताड़ित किया जाता है।”
जबकि इस बिच ‘एक्स मुस्लिम्स ऑफ केरल’ के अध्यक्ष डॉक्टर आरिफ हुसैन थेरुवथ ने आगे बताया की, वैसे तो हर धर्म नास्तिक लोगों के साथ भेदभाव करता है, लेकिन इस्लाम इस मामले में कट्टर है, जो लोग इस्लाम छोड़ देते हैं, लोग उनके साथ बहुत बुरा व्यवहार करते हैं. हालाँकि डॉ आरिफ कहते हैं की, “इस्लाम में पैगंबर मोहम्मद की बातों को पत्थर की लकीर मानते हैं, लेकिन उनके जीवन को ध्यान से पढ़ें तो उनके अपने कैरेक्टर पर ही सवाल खड़े होते हैं.”


इन सब के बिच केरल की आयशा मर्केराउज का नाम सामने आया जिसमे मीडिया रिपोर्ट्स में उसके बयान भी सामने आये, यहां दरअसल आयशा ने इस्लाम छोड़कर नास्तिकता को अपना लिया, जिसके बाद उन्होंने कहा करीब मैं 10 सालों से ऊहापोह की स्थिति में थीं. इस्लाम को लेकर मेरे भीतर सवाल ही सवाल थे, जिसके चलते मैंने कुछ साल पहले पैगंबर मोहम्मद की बायोग्राफी पढ़ी। यहां आयशा ने आगे बताया, जैसे-जैसे मैं इस किताब को पढ़ती गई, मेरा इरादा पक्का होता गया. यहां उस किताब में दासता और औरतों को लेकर जो बातें लिखी गई हैं, वह मानवाधिकारों की धज्जियाँ उड़ाती है.इस्लाम धर्म छोड़कर नास्तिक बनने वाली आयशा ने कहा की “इसलिए, मैंने दिसंबर 2021 में मस्जिद जाकर इस्लाम छोड़ने का फैसला किया” आयशा की ही तरह केरल के कई ऐसे लोग हैं, जो इस्लाम छोड़ चुके हैं, लेकिन इस मजहब को छोड़ने वालों के साथ मुस्लिम लोग बहुत बुरा बर्ताव करते हैं. उन्होंने कहा मेरे घर वाले बातचीत तो करते हैं, पर अब पहले वाली बात नहीं रही.


मौजूदा समय में जिस तरीके से केरल में ‘एक्स मुस्लिम्स ऑफ केरल’ नाम के संगठन पर बाते हो रही है उसको लेकर संथा के अध्यक्ष डॉ आरिफ ने जानकारी दी है, इसमें ये दावे कहाँ तक सही है, इसपर रिपोर्ट ही जानकारी दे सकती हैं, जहाँ फिलहाल किसी भी तरीके से इसपर पुलिस या क़ानूनी दांव नहीं फसा लेकिन संस्था का दावा कही न कही लोगो के बिच सुर्खियां बन रहा है. जनवरी 2022 से चल रहे इस संस्था से जुडी खबर अब और भी तेजी से चर्चा का विषय बन रही है.

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