मोदी को नीतीश की गारंटी! महागठबंधन से टूटने से लेकर फ्लोर टेस्ट का सफर

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज फ्लोर टेस्ट के दौरान सदन में बहुमत साबित कर रहे हैं. 7 फरवरी को PM मोदी से मुलाकात के बाद सीएम ने अपना रुख साफ किया था

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज फ्लोर टेस्ट के दौरान सदन में बहुमत साबित कर रहे हैं. नीतीश कुमार ने जबसे महागठबंधन का साथ छोड़कर बीजेपी के नेतृत्व वाली NDA गठबंधन के सरकार के साथ गए हैं, देशभर में राजनितिक हलचल तेज हो गई है. पिछले 14 दिनों से विधायकों के मनाने की कवायत चल रही है.

5 पॉइंट में जाने फ्लोर टेस्ट तक कैसे आई बात?

  • 28 जनवरी को RJD के साथ गठबंधन में रहे नीतीश कुमार ने उनका साथ छोड़ दिया. नीतीश कुमार ने इस्तीफा दिया और 28 जनवरी को NDA के साथ फिर अपनी सरकार बना ली. मुख्यमंत्री ने 3 फरवरी को अपने विभाग बात दिए और कार्य शुरू किया.
  • नीतीश कुमार ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ सरकार बनाने के बाद 7 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की. इस दौरान मुख्यमंत्री ने दावा किया कि अब वो बीजेपी का साथ नहीं छोड़ेंगे.
  • संविधान के अनुसार ऐसे स्थिति मे किसी भी मुख्यमंत्री को अपनी सरकार के बहुमत का दावा करना होता है. 9वीं बार मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार को फ्लोर टेस्ट का सामना करना है.
  • फ्लोर टेस्ट एक संवैधानिक व्यवस्था है, जिसके तहत बिहार में नीतीश कुमार की JDU और तेजस्वी यादव की RJD अपने पास ज्यादा विधायकों के होने का दावा कर रहे हैं.
  • बिहार विधानसभा में विधायकों के पाले बदल जाने का डर सभी राजनितिक पार्टियों के पास है. हालांकि मौजूदा स्थिति में सदन के अध्यक्ष बिहारी चौधरी को हटा दिया गया है. वहीं फिलहाल पक्ष में 125 वोट पड़े. वहीं, प्रस्‍ताव के विपक्ष में सिर्फ 112 वोट डाले गए.
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