पैगम्बर मोहम्मद विवाद में नसीरुद्दीन शाह की एंट्री, कहा- PM को आगे आकर नफरत के जहर को रोकने की जरूरत

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मैं प्रधानमंत्री से अनुरोध करूंगा कि वो इन लोगों को थोड़ी अच्छी समझ दें. ऋषिकेश में धर्म संसद में जो कहा गया. अगर वो उसमें भरोसा करते हैं तो उन्हें ऐसा कहना चाहिए. अगर वो इसमें भरोसा नहीं करते हैं तो भी उन्हें ये बात कहनी चाहिए

पैगम्बर मोहम्मद पर विवादित टिपण्णी को लेकर नूपुर शर्मा के अलावा भाजपा के पूर्व प्रवक्ता नवीन कुमार जिंदल को बीजेपी ने निष्कासित कर दिया। इस बिच बाद में नूपुर शर्मा ने माफ़ी भी मांगी, लेकिन फिलहाल ये मामला तूल पकड़ रहा है. इस घटनाक्रम के बाद कुछ देशों ने तो भारतीय दूत को तलब कर लिया था.

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बता दें कि कतर, कुवैत, पाकिस्‍तान इंडोनेशिया समेत 10 से ज्‍यादा मुस्लिम देशों ने पैगंबर पर की गई टिप्‍पणी की आलोचना की थी।इसके बाद लगातार विपक्षी पार्टियां भी बीजेपी पर हमलावर हो रही है, लेकिन इस बिच अब बॉलीवुड एक्टर नसीरुद्दीन शाह ने भी एंट्री ले ली है.

यहां अपने एक इंटरव्यू के दौरान नसीरुद्दीन शाह ने इस विवाद पर खुलकर अपने विचार रखे. इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि मैं प्रधानमंत्री से अनुरोध करूंगा कि वो इन लोगों को थोड़ी अच्छी समझ दें. ऋषिकेश में धर्म संसद में जो कहा गया. अगर वो उसमें भरोसा करते हैं तो उन्हें ऐसा कहना चाहिए. अगर वो इसमें भरोसा नहीं करते हैं तो भी उन्हें ये बात कहनी चाहिए.

उन्होंने आगे कहा, प्रधानमंत्री ट्विटर पर जिन नफरत फैलाने वालों को फॉलो करते हैं, उन्हें उनके लिये कुछ करना चाहिए. जहर को बढ़ने से रोकने के लिए उन्हें कड़ा कदम उठाने की जरूरत है. नसीरुद्दीन शाह ने ये भी कहा कि मोदी सरकार ने जो कार्रवाई की, बहुत बहुत कम और बहुत देर से की. इसके अलावा उन्होंने ये भी कहा कि एक दिन लोगों में अच्छी समझ आएगी और मुसलमानों के खिलाफ नफरत खत्म होगी.

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इस दरम्यान जब जिक्र हुआ कि बीजेपी ने नूपुर शर्मा को निष्कासित कर एक कठोर कदम उठा लिया है साथ हीं नूपुर शर्मा ने भी अपने बयान पर माफी माँगा, जिसपर जवाब देते हुये नसीरुद्दीन शाह ने इसे एक पाखंड बताया है.

एक्टर ने कहा कि उन्हें ऐसा कोई भी किस्सा याद नहीं है जब किसी मुस्लिम ने हिंदू-देवताओं पर विवादित कमेंट किया.
इसके साथ हीं नसीरुद्दीन शाह के दौरान नूपुर शर्मा को जान से मरने, बलात्कार जैसी धमकीयोन की निंदा की है.

वहीँ नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि आज आलम यह है कि यदि कोई मुस्लिम अपने अधिकार की बात करता है, तो उस पर निशाना साधा जाता है. आखिर हम हर किसी को भारतीय की तरह क्यों नहीं देखते.

वो कहते हैं कि अगर आप शांति और एकता की बात करते हैं, तो आपको एक साल के लिये जेल में डाल दिया जाता है. वहीं अगर कोई नरसंहार की बात करे, तो मामूली सी सजा दी जाती है. ये दोहरे मापदंड की तरह है, जो जॉर्ज ऑरवेल के उपन्यास ‘1984’ में दिखाई गई दोहरी सोच को दर्शाता है.

बता दें कि विवाद के बिच साइबर यूनिट ने नूपुर शर्मा के साथ साथ नवीन कुमार जिंदल, शादाब चौहान, सबा नकवी, मौलाना मुफ्ती नदीम, अब्दुल रहमान, गुलजार अंसारी, अनिल कुमार मीणा और पूजा शकुन के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इनपर आरोप है कि सभी ने भड़काऊ बयां दिए हैं जिसे लेकर केस दर्ज हुआ है, इसके बाद अब पुलिस इस मामले में जांच कर रही है.

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