Maidaan Movie Review – Real Story

ज़रूर पढ़ें

Nisha
Nisha
--------------------------

आज अजय देवगन की फिल्म मैदान परदे पर आ चुकी है,इसके रिलीज़ की जानकारी शायद ज्यादा लोगों को ना हो,लेकिन बेहतर स्टोरी या फिल्म दर्शकों से ना छूटे इसलिए हम लेकर आये हैं मैदान का रिव्यु. जहाँ आपको इस फिल्म से जुडी हर छोटी बड़ी जानकारी देंगे.

बॉलीवुड में कई मूवीज रही जो बायोपिक पर बनी है,खास कर स्पोर्ट्स को हाईलाइट करने वाली फिल्में भी लोगों ने खूब पसंद किया. उस दर्शकों के उसी इंटरेस्ट को देखते हुए डायरेक्टर्स स्पोर्ट्स पर खिलाडियों पर कई प्रोजेक्ट्स पर काम क्र रहे हैं और हिंदी सिनेमा को इससे बेहतरीन मूवीज भी मिले हैं. जैसे की सचिन तेंदुलकर की बायोपिक,एमएस धोनी की बायोपिक,प्रवीण ताम्बे की बायोपिक. लेकिन ये साड़ी फिल्में या यूँ कहें की ज्यादातर फिल्में क्रिकेट पर बेस्ड बनी है. लेकिन डायरेक्टर अमित रविन्‍द्रनाथ शर्मा लेकर आये हैं एक फूटबाल कोच की कहानी,जो न केवल कहानी है बल्कि समाज के लिए उदाहरण और हर किसी के लिए प्रेरणा भी है. ये फिल्म आधारित है फिल्‍म भारतीय फुटबॉल के गोल्‍डन इरा 1952 से 1962 तक के सफर पर. इस फिल्म में अजय देवगन मुख्‍य भूमिका में हैं। वहीं उनके अपोजिट साउथ सुपर ऐक्‍ट्रेस कीर्ती सुरेश नजर आयेंगी। फिल्‍म का निर्माण बोनी कपूर, आकाश चावला और अरुणवा रॉय सेन गुप्‍ता ने किया है. जिस फूटबाल कोच की बायोपिक पर ये फिल्म तैयार की गयी है वो हैं सैयद अब्दुल रहीम।

- Advertisement -

अब अजय देवगन के इस करैक्टर की बात कर लेते हैं. लेकिन पहले असल हीरो यानि की सैयद अब्दुल रहीम को जान लेते हैं.

भारतीय फुटबॉल टीम के कोच और मैनेजर रहे सैयद अब्दुल रहीम को फुटबॉल जगत में खासा सम्मान हासिल है। भारतीय फुटबॉल के स्वर्णिम काल में ऊंचाई तक पहुंचाने के लिए उन्हें ही श्रेय दिया जाता है। रहीम को एक फाइटर माना जाता है जिसने कैंसर से जूझते हुए भी अंतराष्ट्रीय जगत पर गोल्ड मेडल दिलवाया था। सैयद अब्दुल रहीम 1950 से 1963 तक इंडियन नैशनल फुटबॉल टीम के कोच और मैनेजर रहे थे।

सैयद अब्दुल रहीम का जन्म 17 अगस्त 1909 में हैदराबाद में हुआ था। उन्होंने अपना करियर हैदराबाद सिटी पुलिस के कोच के तौर पर किया था। इसके बाद जब उनकी टीम नैशनल लेवल पर बेहतरीन प्रदर्शन करने लगी तो उन्हें 1950 में इंडियन नैशनल फुटबॉल टीम का कोच बना दिया गया। उस दौर में भारतीय खिलाड़ी नंगे पैर फुटबॉल खेला करते थे। ये रहीम ही थे जिन्होंने इंडियन टीम को जूते पहन कर फुटबॉल खेलना सिखाया और दुनिया की मजबूत टीमों में खड़ा कर दिया।

- Advertisement -

यह भारतीय फुटबॉल का स्वर्णिम दौर था। साल 1951 के एशियन गेम्स में भारतीय टीम गोल्ड मेडल जीता। रहीम की सफलता का सर्वोच्च शिखर था जब भारतीय टीम 1956 के ओलिंपिक्स में सेमीफाइनल तक पहुंच गई। हालांकि सेमीफाइनल में टीम को हार का सामना करना पड़ा लेकिन टीम का उत्साह देखने लायक था। इसके बाद साल 1962 के एशियन गेम्स में भी भारतीय टीम ने गोल्ड मेडल जीता।

इस किरदार को अजय देवगन ने निभाया तो पूरी तरह है लेकिन कुछ कमी रह गयी है,हलाकि कहानी दर्शकों के दिल तक उत्तरी है.

- Advertisement -

Latest News

अन्य आर्टिकल पढ़ें...