लता क्यों बनते-बनते रह गयी राजस्थान के डोंगरपुर की महारानी ?

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Nisha
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कहते हैं की लता मंगेशकर राजस्थान के डूंगपुर की महारानी बनते बनते रह गयी थी. इस बात का क्या मतलब है और वो कौन सी कहानी थी, जिसके अधूरेपन के कारण उनकी मोहबत भी पूरी नहीं हो पायी, इसी पर आज हम बात करेंगे.

कैसे बनने वाली थी राजस्थान के डूंगपुर की महारानी ?

मेरी आवाज़ ही मेरी पहचान है…. इसी गीत से अपने पहचान को और भी गहरा करने वाली गायिका हम सको अलविदा कह कर जा चुकी हैं.उनके जाने के गम में पूरा देश डूबा है. सुरों की देवी कहे जाने वाली लता के जाने से देश के साथ साथ दुनिया के कई दिग्गज भी शोकविभोर हो रहे हैं. उनका योगदान बॉलीवुड गानों में 5 दशक तक रहा, जिन्होंने जीवन में गानों के जरिये सबके प्रेम को पूर्ण किया,उनहीं की ज़िन्दगी इश्क़ के लाल रंग से नहीं रंग पायी. उनकी प्रेम कहानी अधूरी रह गयी ये तो सभी जानते हैं. लेकिन ये शायद ही कोई जानता होगा की लता ने अगर अपने प्यार से शादी की होती तो आज उनकी उपाधि केवल गायिका ही नहीं रहती बल्कि महारानी की भी होती वो कैसे वो हम आपको आगे बताएंगे.

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कौन थे राजकुमार राजा सिंह ?

सबसे पहले आपको बता दें की आखिर वो थे, कौन जिन पर लता ने दिल हारा था. वो कोई आम इंसान नहीं बल्कि, राजस्थान के डुंगरपुर के राजकुमार राजा सिंग थे, जो क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के पुर्व अध्यक्ष थे. इनके नाम से ही पता चलता है की ये शाही परिवार से थे.

कैसे शुरू हुई थी प्रेम कहानी ?

इनकी प्रेम कहानी के बढ़ने के पीछे की वजह थे लता के भाई. दरअसल, राजा सिंह लता के भाई के बहुत करीबी मित्र थे. इन दोनों की दोस्ती क्रिकेट के कारण गहरी थी. यहाँ तक की वो लता को प्यार से मिठू पुरस्कार करते थे.

क्यों नहीं हो पायी शादी ?

अब जब प्यार दोनों ही तरफ से परवान चढ़ चूका था तो आखिर ऐसा क्या हुआ की वो एक हो कर भी एक नहीं हो पाए.
इनके प्रेम कहानी में भी एक विलन थे और वो थे खुद राजा सिंह के पिता महाराज लक्षम सिंह. उनका कहना था की राजा रजवाड़े के घर की बहु बन कर कोई आम सी लड़की नहीं आ सकती. उसे भी शाही परिवार और रुतबे की पारिवारिक पृष्टभूमि रखनी होगी. शायद उनके पिता तब नहीं समझ पाए थे की रिश्ते सौभाग्य से होते है, भेद-भाव से नहीं.
इस बात से भी वो अनजान रहे की वही आम सी लड़की, सुरों की विख्याता बन जाएगी. लेकिन लता का प्रेम भी इतना कमजोर नहीं था की महज एक फैसले से सब खत्म हो जाये. राजा सिंह और लता के रिश्ते की बुनियाद प्रेम, विशवास और सम्मान था. दोनों दूर तो रहे लेकिन दिलों से सदैव करीब थे. वो दोनों ने अपने रिश्ते के स्वरूप को प्रेम से दोस्ती में बदल दिया और अमर कर दिया.
हालाँकि, 12 सितंबर को महाराज राजसिंह की पुण्यतिथि है. उनका निधन 2009 में हो गया था.

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क्या थी दूसरी वजह?

वहीँ एक और कारन है जिसमें इस बात का उल्लेख होता है की क्यों उन्होंने शादी नहीं की. दरअसल, घर की जिम्मेदारियों ने उनके कांडों पर इतना बोझ डाल दिया था की उन्हें अपनी खुशियां नज़र ही नहीं आयी. अपने भाई बहनों के करियर को संवारने के लिए उन्होंने केवल 13 वर्ष की उम्र से ही काम करना शुरू कर दिया था. आने वाली पीढ़ी दर पीढ़ी के लिए लता एक प्रेरणास्त्रोत हैं.

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