PM मोदी नहीं चाहते थे 2000 नोट का चलन, खतरे को भांपते हुए सरकार ने ऐसे मानी बात

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2,000 रुपये के नोट को हाल ही में चलन से बाहर करना का फैसला किया गया है. प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि PM नरेंद्र मोदी कभी भी 2000 रुपये के नोट को जारी करने के पक्ष में नहीं थे

प्रधानमंत्रो मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के कार्यकाल में नोटबंदी को एक बड़े फैसले के रूप में देखा जाता है. इस मामलें को कोट में भी घसीटा गया हालाँकि मोदी सरकार को क्लीन चीट दे दी गई थी. हाल ही में 2,000 रुपये के नोट को चलन से बाहर करना का फैसला किया गया है. बता दें कि 23 मई से 30 सितंबर तक लोग 2000 रुपये के नोट बैंकों में बदल सकते हैं. गौरतलब है की साल 2016 में नोटबंदी का कड़ा फैसला लिया गया. रिजर्व बैंक ने इस दौरान 2000 रुपये के नए नोट जारी किए थे. तब 500 और 1000 रुपये के नोटों को चलन से बाहर किया गया था. जहाँ इस बीच प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) कभी भी 2000 रुपये के नोट को जारी करने के पक्ष में नहीं थे.

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2000 रुपये लाने के पीछे दी गई ये दलील

RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि 2000 रुपये के नोट को मुख्य रूप से पैसे के मूल्य को जल्दी से भरने के लिए जारी किया गया था. तब सिस्टम से तेजी से पैसे निकाले जा रहे थे. जिसका सीधा अर्थ निकलता है कि रिजर्व बैंक ने तब बंद हुए 500 और 1000 रुपये के नोटों की जल्दी भरपाई के लिए 2000 रुपये के नोट जारी किए थे. शक्तिकांत दास ने कहा कि चूंकि मार्केट में अन्य मूल्य के नोटों की कमी नहीं है. इसलिए 2000 रुपये के नोट को वापस लिया जा रहा है.

पीएम मोदी को 2000 नोट से थी आपत्ति

नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि जब मैं प्रधानमंत्री (Prime Minister Narendra Modi) कार्यालय में बतौर प्रधान सचिव के पद पर कार्यरत था. नृपेंद्र के मुताबिक पीएम मोदी 2000 नोट के सख्त खिलाफ दिख रहे थे. प्रधानमंत्री (PM Modi) का मानना था की 2000 रुपये के नोट को कभी गरीबों का नोट नहीं माना जा सकता. उन्हें पता था कि 2000 रुपये के नोट से लेन-देन की बजाय जमाखोरी होगा. जब उन्हें बताया गया कि 2000 के नोट कुछ समय के लिए लाए जा रहे हैं, तो फिर उन्होंने इसकी अनुमति दे दी थी.

प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव ने बताई बात

प्रधानमंत्री कार्यालय (Prime Minister Narendra Modi) में बतौर प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा जब कार्यरत थे तब डिमोनेटाइजेशन का निर्णय लिया गया था. डिमोनेटाइजेशन में पुराने नोट एक निर्धारित तिथि से समाप्त कर दिए जाते हैं और उन नोटों को बदलने की व्यवस्था होती है. इसके लिए भी एक समयसीमा दी जाती है. उन्होंने कहा कि उस वक्त 500 और 1000 रुपये के नोट बंद किए जाने थे और उनके बदलने की व्यवस्था की जानी थी. जाहिर था इसके लिए 500 और 1000 रुपये के नए नोट लाने होते और नए नोटों की व्यवस्था प्रिंटिंग के जरिए की जानी थी. प्रिंटिंग का काम रिजर्व बैंक करता है.

नोटबंदी का गणित

नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि डिमोनेटाइजेशन के वक्त ये देखा गया कि जिस संख्या में पुराने नोट वापस आएंगे और नए नोट जारी किए जाएंगे. उस हिसाब से प्रिंटिंग की क्षमता नहीं थी. इसलिए विकल्प के तौर पर 2000 रुपये के नोट जारी किए गए. क्योंकि जहां 500 रुपये के चार नोट की छापकर 2000 रुपये पूरे होते. वहां सिर्फ एक नोट की छपाई से 2000 रुपये की वैल्यू को पूरा कर लिया गया.

2000 के नोट को गरीबों का नोट नहीं समझते थे पीएम

पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा ने प्रधानमंत्री (Prime Minister Narendra Modi) का जिक्र करते हुए बताया की 2000 के नोट चलन में लाने को लेकर पीएम मोदी (PM Modi) कुछ खास उत्साहित नहीं थे. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी (PM Modi) के मन में ये बात साफ थी कि उचित समय पर 2000 रुपये के नोट वापस ले लिया जाएगा. इसके लेकर उनके मन बिल्कुल भी संदेह नहीं था. इसलिए 2018 के बाद से 2000 रुपये के नोट नहीं छापे गए. पीएम मोदी (PM Modi) के विचारों से हमेशा झलका कि वो 2000 रुपये को नोट को गरीबों का नोट नहीं समझते थे.

प्रधानमंत्री निर्णय पर सहमत नहीं थे

पूर्व प्रधान सचिव ने कहा कि जो टीम इसपर काम कर रही थी उसका प्रस्ताव था कि अगर तय टाइम पीरियड में हमें नोटबंदी करनी है, तो हमें 2000 रुपये के नोट छापने होंगे. इस विषय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) का मन था कि अगर हम 1000 रुपये के नोट बंद कर रहे हैं और उसकी जगह 2000 रुपये के नोट ला रहे हैं, तो लोग कैसे समझेंगे कि ये काले धन को कम करने या उसे समाप्त करने का प्रयास है. क्योंकि एक बड़े नोट के आने से लोगों के पास इसे जमा करना आसान हो जाएगा. इसलिए प्रधानमंत्री (PM Modi) निर्णय पर सहमत नहीं थे.

फिर पीएम ने दी अनुमति

प्रधानमंत्री (Prime Minister Narendra Modi) के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा ने बताया की पीएम मोदी (PM Modi) के सामने करेंसी छापने वाली कंपनियों की क्षमता बताई गई और प्रधानमंत्री नहीं चाहते थे कि नोटों को बाहर से छपवाकर लाया जाए. इसलिए एक ही विकल्प बचा था कि सीमित अवधि में 2000 रुपये के नोट छापने होंगे. स्थितियों को समझते हुए प्रधानमंत्री ने 2000 रुपये के नोट को जारी करने की मंजूरी दी थी.

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