नीतीश कुमार को लगा केजरीवाल का झटका, शिमला बैठक में आने के लिए रखी ये शर्ते

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23 जून ऐतिहासिक दिन बन गया जहां पटना में 15 विपक्षी दलों की बैठक हुई थी. जिसमें केजरीवाल ने कांग्रेस के खिलाफ अध्यादेश को लेकर सवाल उठाए थे

23 जून को पटना की भूमी पर एक ऐतिहासिक कार्यक्रम हुआ. जहां 15 विपक्षी दलों ने एक साथ महाबैठक में शिरकत की. ये बैठक 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लिए रणनीति बनाने की थी. 23 जून के दिन इस महाबैठक में विपक्षी दलों के अधिकाँश नेताओं ने सहमति बनाई. वहीँ एक दूसरे के ऊपर आरोप-प्रत्यारोप का खेल भी खेला. इस बैठक के दौरान राजधानी दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने अध्यादेश का मामला भी उठाया था. अब इस बैठक का अंतिम चरण 12 जुलाई को शिमला में होने वाला है.

शिमला की बैठक में शामिल होने के लिए AAP रखेगी शर्तें

12 जुलाई अब वो दिन बनने जा रहा है, जिस दिन सभी पार्टियों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर मंथन होगा. बता दें की इस बीच आम आदमी पार्टी की तरफ से बिहार के सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के इस महाजुटान को एक बड़ा झटका मिलता हुआ नज़र आ रहा है. कारण ये है की शिमला मीटिंग में आने से पहले आम आदमी पार्टी ने महाबैठक में शामिल हुईं सभी पार्टियों के सामने एक बड़ी शर्त रख दी है. जिसको सुनने के बाद शायद आप हैरान भी हो जाएँ, की ये किस प्रकार का फैसला है. चलिए आज हम आपको बताएँगे की मोदी सरकार के खिलाफ नितीश कुमार की बनाई रणनीति में दोबारा शामिल होने के लिए AAP की क्या-क्या शर्तें हैं?

क्या कांग्रेस करेगी अध्यादेश का विरोध?

23 जून 2023 यानि बीते शुक्रवार के दिन पटना में हुई विपक्षी की बैठकों के बात आम आदमी पार्टी ने बयान जारी किया है. जिसमे उन्होंने कहा है की “जब तक कांग्रेस नेता सार्वजानिक रूप से काले अध्यादेश का विरोध नहीं करते, और जब तक वो ये घोषणा नहीं करते की उनके 31 राजसभा के सांसद राज्यसभा में अध्यादेश का विरोध नहीं करते. तब तक AAP के लिए समान विचारधारा रखने वाले दलों की भविष्य में होने वाली बैठक में भाग लेना काफी मुश्किल होगा. जिसमे congress भी पूर्ण रूप से शामिल हो रही है.

11 दल का AAP को समर्थन

AAP ने आगे कहा की. पटना में हुई बैठक में 15 विपक्षी दलों ने भाग लिया था. जिसमे से 12 डालें राजयसभा का हिस्सा है. उन्होंने कहा की कांग्रेस छोड़कर अन्य 11 दलें राजयसभा में काले अध्यादेश को लेकर विरोध करेंगे.

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उन्होंने बताया की 11 विपक्षी दल अध्यादेश के खिलाफ स्पष्ट रूप से अपना रुख साफ़ कर रही है. इन पार्टियों ने घोषणा की है की वो राजयसभा में इसका विरोध करेंगे. वहीँ कांग्रेस की तरफ से एक बयान सामने आया है, जिसमें दिल्ली और पंजाब यूनिट्स ने घोषणा की है कि पार्टी को इस मुद्दे पर मोदी सरकार का समर्थन करना चाहिए.

CONTENT: NIKITA MISHRA
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