Jhund- Movie Review

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Nisha
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फिल्म ‘सैराट’ से चर्चा में आए नागराज पोपटराव मंजुले की तरफ से डायरेक्ट की गई मेगास्टार अमिताभ बच्चन स्टारर फिल्म ‘झुंड’ शुक्रवार को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है। फैंस को फिल्म का बेसब्री से इंतजार है।

‘झुंड’ की बात शुरू करने से पहले मैं आपको बता दूं कि नागराज मंजुले वहीं हैं, ज‍िन्‍होंने अपनी मराठी फिल्‍म ‘सैराट’ से देशभर में हंगामा मचा द‍िया था.

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फिल्‍म के पहले ही सीन से आप झुग्‍ग‍ियों और बस्तियों की दुन‍िया का ऐसा चेहरा देखते हैं, जो ब‍िलकुल सच है. ज‍िसमें जबरदस्‍ती की ‘पेंटिंग’ करने की कोशिश नहीं है. 3 घंटे की इस फिल्‍म में शुरुआत का समय करेक्‍टर और वो महौल सेट करने में लगाया गया है, ज‍िसकी कहानी आपको आगे सुननी है. हालांकि मुझे ये फिल्‍म थोड़ी लंबी लगी और इसे थोड़ा छोटा क‍िया जा सकता था. कई सीन्‍स आपको लंबे लग सकते हैं. फिल्म में बैकग्राउंट स्‍कोर का बहुत ज्‍यादा इस्‍तेमाल नहीं है, लेकिन म्‍यूज‍िक इस फिल्‍म का अच्‍छा है. म्‍यूज‍िक डायरेक्‍टर अजय-अतुल ने अपने स‍िग्‍नेचर अंदाज में कुछ भावुक और ‘झ‍िंगाट’ टाइप गाना ‘झगड़ा झाला…’ भी है.

एक्टिंग की बात करें तो अम‍िताभ बच्‍चन को एक्टिंग के लिए आंकना मुझे नहीं लगता सही होगा, क्‍योंकि वह अब खुद एक्टिंग का एक इंस्‍ट‍िट्यूट हो चुके हैं. लेकिन काबिल-ए-तारीफ बात ये है कि अमिताभ बच्‍चन के सामने झुग्‍गी बस्‍ती के बच्‍चों का क‍िरदार ज‍िन बच्‍चों ने क‍िया है, वो कमाल हैं. उनका अंदाज, बॉडी लेग्‍वेज आप हर चीज की तारीफ करेंगे. बॉलीवुड अंदाज की ड‍िशुम-ड‍िशुम नहीं है, बल्कि असली मारपीट ज‍िसे कहते हैं, वो आपको देखने को म‍िलेगी.

इस फिल्‍म में एक फुटबॉल मैच भी है, उसे देखकर हो सकता है मेरी तरह ही आपको भी ‘चक दे’ का वो सीन याद आ जाए… जब वर्ल्‍ड कप में पहुंची टीम टाई-ब्रेकर से मैच जीतती है. आखिर में कहूं तो एक ह‍िंदी फिल्‍में देखते आ रहे दर्शकों के लिए एक मराठी न‍िर्देशक की अच्‍छी कोशिश है, जो स‍िनेमा को अलग ही अंदाज में द‍िखाता है. कई बार आपको ये फिल्‍म डॉक्‍यूमेंट्री जैसी लगने लगेगी, लेकिन ये भी एक तरीका है कहानी कहने का और मेरे ह‍िसाब से मजेदार तरीका है.

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