Janhit Mein Jaari Movie Review

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Nisha
Nisha
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नुसरत भरुचा की मूवी जनहित में जारी बॉलीवुड और एक से एक कलाकार को भरी पड़ रही है. सबसे पहले तो आपको कहेंगे की इस मूवी को जरूर से जरूर देखे.अगर आप एक बेहतर कहानी प्लस हुमूर धुंध रहे हैं तो आपको ये कॉम्बो यहीं मिलेगा. ये एक मैसेज विथ हुमोरोस मूवी है. अगर आप पेट पकड़ के हसना चाहते हैं या कंडोम को ले कर प्रॉपर समझ और जानकारी पाना या शेयर करना चाहते हैं तो जनहित में जारी ही वो तरीका है.

स्टार कास्ट से शुरू करते हैं…
नुसरत भरुचा as मन्नू
विजय राज
टिन्नू आनंद
अनुद सिंह ढाका
परितोष त्रिपाठी
सुकृति गुप्ता as बबली
ईशान मिश्रा as अचानक कुमार सभी मौजूद हैं.

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अब आते हैं फिल्म की कहानी पर। कहानी सेट है, मध्य प्रदेश के ओरछा में, जहां रहती हैं मनोकामना त्रिपाठी। अब मनोकामना की कामना तो हर कोई करता है, फैमिली चाहती है कि मनोकमना उनकी कामना पूरी करें और शादी करें। मनोकमाना चाहती हैं उसकी कामना पूरी हो, और नौकरी मिले। छोटे से शहर ओरछा की मनोकामना, छिप-छिप लो-फैट Wheat बीयर पीती है और बचपन से मनोकामना की कामना लेकर दोस्ती की आड़ में छिप-छिप कर प्यार जताने वाले देवी, शादी के लिए अपने परफेक्ट होने का सुबूत देते पॉवर प्वाइंट प्रेजेंटेशन बना रहे होते हैं।

शादी से दूर भागती मनोकमाना से आदरणीय जी टकराते हैं और अपनी डूबती कंपनी लिटिल अबंरेला यानि फ्लेवर्ड कंडोम बनाने वाली फैक्ट्री के मालिक, 40 हज़ार रूपए महीने में काम करने की पेशकश थमाते हैं। ओरछा की लोअर मिडिल क्लास फैमिली की लड़की क्या कंडोम बेचेगी ? इस बात पर, घर वाले फड़फड़ाते हैं फिर मान जाते हैं, लेकिन मनोकामना के प्यार में डूबे रंजन जी, शादी के पहले अपने घर वालों से ये बात छिपाते हैं और छतरी की फैक्ट्री वाला बहाना थमाते हैं। ये बात खुलनी थी, हंगामा होना था, मनोकामना का घर जलना था, ये सब कुछ होना था, लेकिन फिर मनोकामना को अहसास होता है कि कंडोम की बात दबानी नहीं है, बोलनी है और सबको बतानी है। सेफ सेक्स के बारे में समझाना है, अबॉर्शन से होने वाले ख़तरों के बारे में लोगों को जागरूक करना है। क्या मनोकामना की फैमिली ये बात मानेगी ? ससुराल कंडोम बेचने वाली बहू को अपनाएगा ? पति, अपनी पत्नी का साथ दे पाएगा ? इन सबका जवाब हां है, लेकिन कैसे ? यही तो फिल्म है।

जनहित में जारी एक टैबू टॉपिक पर बनी, बेहतरीन और शानदार फिल्म है, जो आप को एक बार हंसाना शुरु करेगी, तो क्लाइमेक्स तक हंसाती ही जाएगी। थोड़ा समझाएगी, कुछ मिनटों के लिए इमोशनल झटके भी देगी, और फिर से हंसाते-हंसाते लॉफ्टर की डोज़ देती जाएगी।

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एक्टिंग
फिल्म के हर किरदार ने बेहतरीन एक्टिंग की है, चाहे वो नुसरत भरुचा हो या अनुद सिंह। पारितोष त्रिपाठी ने कॉमेडी का अच्छा तड़का लगाया है। वहीं नुसरत के बॉस के किरदार में बिजेंद्र कला ने भी बहुत अच्छा काम किया है। इसी बीच नुसरत के ससुर के किरदार में विजय राज की एक्टिंग कमाल की है।

डॉयरेक्शन

इस फिल्म की जान है इसका फिल्म का स्क्रीप्ले डायरेक्शन और डायलॉग बहुत ही अच्छे हैं, होंगे भी क्यों नहीं फिल्म को ड्रीम गर्ल बनाने वाले राज शांडिल्य ने जो लिखा है। उनके वन लाइनर और कुछ सीक्वेंस तो गजब के हैं। जय बसंतू सिंह ने अच्छा डायरेक्शन किया है। फिल्म की खास बात ये है कि फिल्म हंसाने के साथ- साथ अच्छा सोशल मैसेज देती है। अबॉर्शन और कांट्रेसेप्शन जैसे विषयों पर आपको गंभीरता से सीख देती है।

सांग्स की बात करें तो बहुत ही खूबसूरत गाने हैं,रोमांटिक सांग भी है,इमोशनल सांग भी है,एक होली सांग भी है लेकिन जो गाना सबसे ज्यादा चर्चा में रहा है वो है इसका टाइटल ट्रैक जिसे आवाज़ दी है रफ़्तार ने.

क्या देखनी चाहिए यह फिल्म?

हां, दर्शकों को यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए। ना ही सिर्फ मनोरंजन के लिए बल्कि एक अच्छी सीख हासिल करने के लिए भी यह फिल्म देखना उचित रहेगा। दर्शकों को इस फिल्म में बहुत कुछ नया देखने को मिलेगा।

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