चंद्रयान-3 के बाद ISRO के 6 अपकमिंग मिशन, सूरज से लेकर अब मंगल पर लहराएगा तिरंगा

ज़रूर पढ़ें

चंद्रयान-3 की सफलता के बाद ISRO के भारतीय वैज्ञानिक अब आने वाले कई अन्य मिशन पर जुट गए हैं. इसमें शुक्रयान, मंगलयान, सूर्य मिशन जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट हैं जिन्हें जल्द हीं ISRO लांच करने वाला है

ISRO ने चंद्रयान-3 (Chandrayan-3) मिशन को सफल बनाया है. चन्द्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाले विक्रम लैंडर और प्रज्ञान अब अलग हो चुके हैं. अध्ययन करने के लिए रोवर प्रज्ञान अब चाँद की सतह पर जानकारियां जुटा रहा है. इसके हर मूवमेंट पर ISRO की नजर है. ऐसे में भारतीय वैज्ञानिक अब आने वाले कई अन्य मिशन पर जुट गए हैं. इसमें शुक्रयान, मंगलयान, सूर्य मिशन जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट हैं जिन्हें जल्द हीं ISRO लांच करने वाला है.

- Advertisement -

आदित्य L1 (सूर्य मिशन)

ISRO भारत का पहला सूर्य मिशन आदित्य L1 सितंबर 2023 में लॉन्च करने जा रहा है. 378 करोड़ की लागत से बने आदित्य L1 अंतरिक्ष यान लगभग 120 दिनों तक अपनी खोज करेगा। यहां इस मिशन द्वारा ISRO सूरज से निकलने वाले रेडिएशन पर स्टडी करेगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा दी की गई जानकारी मुताबिक आदित्य L1 के अंतरिक्ष यान को सूर्य और पृथ्वी लैंग्रेज बिंदु के चारों तरफ एक प्रभामंडल ऑर्बिट में हीं रखा जायेगा। बता दें कि आदित्य L1 अंतरिक्ष यान सूर्य की ऑर्बिट तक जायेगा.

ऐसे में यान अपने साथ साथ पेलोड लेकर जा रहा है. इसमें ख़ास तौर पर जो चार पेलोड हैं उनका काम है सूर्य के बारे में सभी जानकारी इक्कठा कर लेना जिसपर अध्ययन किया जायेगा. इसमें लगे तीन पेलोड ऑर्बिट के बारे में जानकारी लेंगे और इस डाटा को ISRO तक पहुंचाएंगे। आपकी जानकारी के लिए बता दें की जिस जगह आदित्य L1 अध्ययन करेगी वो पृथ्वी से 1.5 मिलियन किमी दूर है.

NISAR

भारत का ISRO अब नासा के साथ मिलकर बड़े निशान परअपनी ताकत लगा रहा है. NISAR का अर्थ हीं यहां इसरो और नासा का सार बताया गया है. इसरो और नासा का ये संयुक्त मिशन पूरी दुनिया के लिए वरदान माना जाएगा. उम्मीद जताई जताई जा रही है की इस साल सितम्बर के महीने में NISAR का सेटेलाइट जीएसएलवी-एमके2 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा. इस मिशन द्वारा पृथ्वी के ऑर्बिट में एक ऐसा सेटेलाइट प्रक्षेपित किया जायेगा जिससे, पूरी दुनिया का मानचित्र महज 12 दिन में तैयार हो जायेगा. इस मिशन से पृथ्वी पर होने वाले जलवायु परिवर्तन, भूस्खलन, सुनामी, भूकंप, समुन्द्र स्तर में वृद्धि, बर्फ द्रव्यमान, वनस्पति की गतिविधियों को पहले हीं ट्रैक कर लिया जायेगा. 10 हज़ार करोड़ की लागत से बने NISAR मिशन द्वारा भारत में जोशीमठ, हिमाचल जैसी आपदा के बारे में पहले हीं जानकारी मिल जाएगी. उम्मीद जताई जा रही है.

मिशन गगनयान

9,023 करोड़ रुपए की लगत से तैयार मिशन गगनयान भी भारत का मान बढ़ने के लिए तैयार हो रहा है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के चीफ एस सोमनाथं ने जानकारी देते हुए बताया की ISRO जलवायु अवलोकन उपग्रह इनसैट-3डीएस भी लॉन्च करने वाली है। बहुत जल्द हीं मिशन गगनयान के क्रू एस्केप सिस्टम की पुष्टि के लाइट एक ट्रायल मिशन लांच किया जायेगा। बता दें कि साल 2024 तक ISRO द्वारा 3 सदस्य दल को 5 से 7 दिनों के लिए अंतरिक्ष भेजा जायेगा. बता दें की ये भारत द्वारा बनी पहली मानव मिशन है.

मिशन मंगलयान-2

साल 2014 के सफलता के बाद ISRO द्वारा एक बार फिर मंगलयान मिशन 2 को लॉन्च करने की तैयारी में है. यहां ISRO ऑर्बिटर मार्स के सबसे करीब ऑर्बिट में रहने की कोशिश करेगा. ISRO के इस मिशन द्वारा ऑर्बिटर मार्स के वातावरण और मार्स से निकलने वाले रेडिएशन पर अध्ययन करेगा.

शुक्रयान-1

500 से 1000 करोड़ की लागत में शुक्रयान मिशन 1 को तैयार किया जायेगा. ISRO द्वारा शुक्रयान को शुक्र पर भेजने का लक्ष्य उस गृह की जलवायु और संरचना पर अध्ययन करना है. इसके अलावा शुक्र की जमीनी सतह, वहां की हवा हर तरीके से स्टडी होगी. बता दें कि शुक्रयान एक अंडाकार ऑर्बिट में शुक्र के चारो तरफ चार वर्ष तक चक्कर लगाएगा. ISRO शुक्रयान को साल 2031 तक लांच करेगा.

स्पेडेक्स मिशन

स्पेडेक्स मिशन यानी स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट अपना स्पेस डॉक बना रहा है. इसरो इस मिशन का उद्देश्य भारत का अपना स्पेस स्टेशन बनाना है. साल 2024 में लांच होने जा रहे इस मिशन में 124 करोड़ की लागत लगी है.

- Advertisement -

Latest News

अन्य आर्टिकल पढ़ें...