OIC की बैठक में Pakistan के साथ मुस्लिम देशों ने अलापा Kashmir राग, भारत ने दिया करारा जवाब

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हम भारत से मांग करते हैं कि वह अंतरराष्‍ट्रीय कानूनों और मानकों का पालन करे और इस पूरे मामले की पाकिस्‍तान के साथ मिलकर संयुक्‍त जांच करे. पाकिस्‍तान भी संयुक्‍त जांच की मांग कर रहा है, जिसे भारत ने खारिज कर दिया है

हमारे पास खाने को नहीं है, व्यवस्था के नाम पर जीरो बाटा सन्नाटा लेकिन लेकिन लेकिन हम तर्रकी कर रहे भारत के लिए जमकर टिपण्णी करेंगे.

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आपने एक कहावत सुनी होगी उल्टा चोर कोतवाल को डाटें, जी हाँ मतलब अपनी गलती कितनी भी हो हमें सामने वाले को दोष देना है.

वैसे तो आप ये अच्छे से जानते हैं, की पाकिस्तान किस हद तक आये दिन नीचता दिखाता है. अपना पेट पालने के लिए लाइमलाइट के लिए किस कदर भारत का नाम ले लेकर अपनी दुकानें चला रहा है. हालाँकि वो अक्सर अपने मकसद में नाकामयाब होता रहा है.

अब अगर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की बात करें जिनकी लुटिया डूबने वाली है, उनके मौजूदा हालात बता देते हैं चुकी इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के बैठक ने जनाब ने कश्मीर राग को बेबुनियादी तरीके से एक बार फिर पेश किया और यहां ओआईसी में मौजूद बाकि मुल्क भी भारत के आतंरिक मुद्दे में टिका टिपण्णी कर चुके हैं.

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यहां 25 मार्च को इमरान खान की गद्दी जाना तय है, जहाँ उनके खिलाफ उनकी हीं पार्टी पीटीआई के सांसदो ने अविश्वास प्रस्ताव साबित करने का फैसला कर लिया है.

जहाँ पाकिस्तानी सेना ने भी इमरान खान का हाथ छोड़ दिया. बौखलाए हुये महासय ओआईसी के बैठक में शामिल हुये.

अब आगे बढे उसे पहले आपको जानकारी दें दे कि दरअसल, ओआईसी मुस्लिम देशों का एक संगठन है. जहाँ ये संयुक्त राष्ट्र के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा अंतर-सरकारी संगठन है.

जिसमे मुस्लिम बहुल देश ओआईसी की सदस्य होते हैं, जबकि मध्य अफ्रीकी गणराज्य, रूस, थाईलैंड, बोस्निया और हर्जेगोविना और गैर-मान्यता प्राप्त तुर्की साइप्रस को ओआईसी के पर्यवेक्षक का दर्जा हासिल है.

अब हुआ ये कि इस बैठक में मुद्दा भारत के इर्द गिर्द हीं घूमता रहा, और अगर इसपर गौर फरमाएं तो ये साफ़ दीखता है कि कदर भारत की बढ़ती छवि और प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता इन्हे चुभ रही है.

इस बैठक में भारत में हुये हिजाब विवाद, कश्मीर का मुद्दा और हाल हीं में भारतीय मिसाइल पाकिस्तान में जा गिरा था उसका भी मुद्दा उठा, यानी कुल मिलकर जिनकी दिमाग की बत्ती गुल हो चुकी है वो भारत की बात कर करके अपना दिमाग चलने की कोशिश कर रहे हैं.

यहां ओआईसी ने अपने प्रस्‍ताव के दौरान बयां में कहा कि हम भारत में मुस्लिमों के साथ कथित भेदभाव और असहिष्‍णुता की नीति की निंदा करते हैं जिससे मुस्लिम राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से अलग-थलग हो गए हैं.

जबकि इन सब का प्रोपेगेंडा यहीं नहीं थमा, आतंकी देश पाकिस्तान के करीबी मुस्लिम मुल्को ने कहा कि, ‘हम भारत में मुस्लिमों की पहचान पर घातक हमले से चिंतित हैं जो हिजाब को निशाना बनाने वाले भेदभावपूर्ण कानूनों से कई गुना बढ़ गया है. हम भारत का आह्वान करते हैं कि इस तरह के भेदभावपूर्ण कानूनों को तत्‍काल खत्‍म किया जाए. साथ ही भारतीय मुस्लिमों के अधिकारों को सुनिश्चित किया जाए और उनके धार्मिक स्‍वतंत्रता की रक्षा की जाए.’

यहां तक की ओआईसी ने कहा कि वह कश्‍मीर के लोगों के साथ एकजुट है. साथ ही कश्‍मीरी लोगों के संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद और ओआईसी के प्रस्‍तावों के मुताबिक आत्‍मनिर्णय के अधिकार का समर्थन करता है.

अब ये सभी टिपण्णी देने वाले वहीँ मुल्क हैं जो चीनी विदेश मंत्री की मौजूदगी में उइगर मुस्लिमों के दमन को लेकर मौन बैठे थे.

अपने मामलों को नजरअंदाज करने वाले इन मुस्लिम देशों ने भारत से मांग की है कि कश्‍मीर में अनुच्‍छेद 370 को फिर से बहाल किया जाए.

वहीँ ओआईसी ने कहा कि हम भारत से मांग करते हैं कि वह अंतरराष्‍ट्रीय कानूनों और मानकों का पालन करे और इस पूरे मामले की पाकिस्‍तान के साथ मिलकर संयुक्‍त जांच करे. पाकिस्‍तान भी संयुक्‍त जांच की मांग कर रहा है जिसे भारत ने खारिज कर दिया है.

वहीँ अक्सर मानवाधिकार का हनन करने वाले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ने इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के बैठक में कहा की ‘हम मुसलमान 1.5 अरब लोग हैं और फिर भी इस घोर अन्याय को रोकने के लिए हमारी आवाज काफी नहीं है. हम किसी देश पर कब्जा करने की बात नहीं कर रहे…हम बस कश्मीर के लोगों और उनके मानवाधिकारों की बात कर रहे हैं.’

अब यहां आपको बता दें कि इस्लामिक सहयोग संगठन की बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भी शिरकत की. जहाँ कहा गया कि कश्मीर पर, हमने आज फिर से अपने कई इस्लामी दोस्तों की पुकार सुनी है. और चीन एक ही उम्मीद साझा करता है. ऐसे में भारत ने सख्त आप्पति जताते हुये इस दखल का विरोध किया.

जहाँ भारत ने पाकिस्तान में इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के इस जम्मू कश्मीर पर दिए गए बयानबाजी आपत्ति जताई और इसे भारत ने अनावश्यक बताया। जबकि इसे बुधवार को खारिज कर दिया.

आपको बता दें की भारत ने कहा कि केन्द्र शासित क्षेत्र से जुड़े मामले पूरी तरह से देश के आंतरिक मामले हैं.

विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन समेत दूसरे देशों को जम्मू कश्मीर पर टिप्पणी करने का कोई हक नहीं है. उन्हें समझना चाहिए कि भारत उनके आंतरिक मामलों पर सार्वजनिक रूप से विचार व्यक्त करने से परहेज करता है.

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