Yogi Adityanath कैसे लेंगे शपथ? क्या होती है पूरी प्रक्रिया

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उत्तरप्रदेश में Yogi Adityanath 21 मार्च 2022 को शपथ लेंगे ऐसे में भारत के सभी राज्यों में मुख्यमंत्री की शपथ एक जैसे हीं होते हैं

उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनावों में प्रचंड बहुमत के साथ भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता को एक बार फिर हासिल कर लिया.

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जनता का भरोसा जीतकर एक बार फिर योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री के गद्दी पर बैठेंगे.

21 मार्च 2022 के दोपहर 3 बजे भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख चेहरों में शुमार योगी आदित्यनाथ सीएम पद के लिए शपथ लेंगे.

ऐसे में बीजेपी की ओर से शपथ समारोह की जमकर तैयारियां चल रही हैं। यहां मीडिया रिपोर्ट्स की जानकारी अनुसार योगी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह को लखनऊ के इकाना स्टेडियम में की जा सकती हैं.

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जहाँ समारोह में बीजेपी के तमाम वरिष्ठ नेता शामिल होंगे, साथ हीं बिपक्ष के भी मुख्य चेहरे नजर आएंगे.

ऐसे में चर्चा होती रही है की आखिर कैसे शपथ ग्रहण का पूरा प्रोग्राम सेट होता है. सवाल होतें है की आखिर मुख्यमंत्री को कौन शपथ दिलातें हैं? वहीँ इसी कड़ी में सबसे बड़ा सवाल ये है कि शपथ ग्रहण के बाद होता क्या है?

तो चलिए यहां हम आपको ये सभी सवालों को बिलकुल आसान भाषा में समझाते हैं.

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शपथ कौन दिलाता है?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि उत्तरप्रदेश में योगी आदित्यनाथ 21 मार्च 2022 को शपथ लेंगे ऐसे में भारत के सभी राज्यों में मुख्यमंत्री की शपथ एक जैसे हीं होते हैं.

हालाँकि राज्य में मंत्रियों और केंद्र में मंत्रियों के लिए अलग अलग नियम हैं, जिनके जरिए शपथ दिलाई जाती है.

यहां भारत के प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पद और गोपनीयता की शपथ राष्ट्रपति द्वारा दिलाई जाती है.

जबकि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस राष्ट्रपति को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाते हैं.

वहीँ राज्य के मुख्यमंत्री और मंत्रीपरिषद को पद और गोपनीयता की शपथ राज्यपाल दिलाते हैं.

शपथ होती कैसे है?

शपथ समारोह में राष्ट्रपति या राज्यपाल शपथ दिलवाने के लिए पहला शब्द उच्चारण करते हैं और फिर मंत्री पूरी शपथ पढ़ते हैं.

ऐसे में आपको जानना जरुरी है कि इस प्रक्रिया को दो बार दोहराया जाता है और दो बार राष्ट्रपति या राज्यपाल मैं बोलते हैं और फिर शपथ लेने वाले व्यक्ति पूरी शपथ को सार्वजनिक तौर पर लेते हैं.

शपथ ग्रहण के बाद आगे की प्रक्रिया क्या है?

यहां ईश्वर की शपथ लेने के बाद पूरे देश के समक्ष मंत्री एक संवैधानिक परिपत्र पर दस्तखत यानी सिग्नेचर करते हैं.

अब आपको जानना जरुरी है की, जिसपर कागजात पर साइन होते हैं वो बेहद अहम् होतें है जिसे राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा संरक्षित रखा जाता है.

यह भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक संवैधानिक दस्तावेज होता है, जो हमेशा हीं सुरक्षित होता है.

शपथग्रहण के तुरंत बाद मंत्रियों के बिच विभागों का बंटवारा किया जाता है. साथ हीं यहीं से जनता की सेवा शुरू हो जाता है.

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