चन्द्रमा पर चंद्रयान 3 कबतक रहेगा एक्टिव? जानें मून मिशन में अब आगे क्या-क्या होगा?

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ISRO के मुताबिक चाँद की सतह पर पहुँचते हीं प्रज्ञान 4 घंटे पर विक्रम लैंडर से निकलकर चहलकदमी कर रहा है. चंद्रमा पर रोवर प्रज्ञान 14 दिन बिताएगा

चंद्रयान-3 (Chandrayan-3) ने इतिहास रचते हुए 23 अगस्त शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चन्द्रमा पर सफल लैंडिंग की है. दक्षिणी ध्रुव पर हिंदुस्तान का झंडा लहरा रहा है. इकलौते भारत ने ये कारनामा सफलतापूर्वक पूरा किया है. पूरी दुनिया ISRO को इस कामयाबी के लिए शुभकमनाएं भेज रहा है. इस गौरवशाली पल के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों ने कड़ी मेहनत की. ऐसे में अब जब चंद्रयान-3 (Chandrayan-3) चन्द्रमा की सतह पर पहुंच चुका है तो, सवाल उठता है कि आखिर इसके बाद अब चंद्रयान-3 (Chandrayan-3) लैंडर का क्या कार्य है? अब भारत को चन्द्रयान-3 (Chandrayan-3) से क्या उम्मीदें हैं? इसके अलावा सवाल ये भी पूछे जा रहे हैं की लैंडर विक्रम से निकल कर प्रज्ञान अब किस खोज में निकला है? इन सभी सवालों के जवाब विस्तार से समझिए.

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चाँद की सतह पर क्या दिखा?

चंद्रयान भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में चंद्रयान-3 (Chandrayan-3) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर पी विरामुथुवल और उनकी टीम की मेहनत ने चन्द्रमा पर विक्रम लैंडिंग को सफल उतारने में दिन रात एक कर दिए. ISRO के मुताबिक चाँद की सतह पर पहुँचते हीं प्रज्ञान, विक्रम लैंडर (Chandrayan-3) से निकलकर चहलकदमी कर रहा है. बता दें कि विक्रम लैंडर ने चाँद की सतह पर पहुंचकर सबसे पहली तस्वीर खींची. ISRO ने तस्वीर साझा की. इसमें लैंडर के पैर की परछाई नजर आ रही है. इसके अलावा लैंडर चाँद की जिस सतह पर उतरा है वो बिलकुल समतल दिख रही है. बता दें कि ISRO लगातार विक्रम लैंडर (Chandrayan-3) के संपर्क में है.

लैंडर में लगे हैं कई सेंसर्स

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा दी गई जानकारी मुताबिक विक्रम लैंडर और अंतरिक्ष एजेंसी के मिशन ऑपरेशंस कॉम्प्लेक्स (MOX) के कम्युनिकेशन लिंक जुड़ा हुआ है. इसके तहत लैंडर की जानकारी जुटाने में ज्यादा मदद मिल रही है. बता दें कि मून मिशन को लेकर ख़ासतौर पर लैंडर में कई वैज्ञानिक तौर पर तैयार सेंसर लगाए गए हैं. इसमें एक्सेलेरोमीटर, डॉपलर वेलोसिटीमीटर, टचडाउन सेंसर, अल्टीमीटर लगा है. बता दें की लैंडर की सुरक्षा की जानकारी तुरंत मिल जाए इसका भी पूरा ख्याल रखा गया है. उसके करंट स्टेटस की जानकारी के लिए लैंडर में कैमरों का सूट शामिल है.

चाँद पर अब लैंडर का क्या काम?

14 जुलाई को चंद्रयान-3 (Chandrayan-3) को लांच किया गया था. लगभग 40 दिन के सफर को तय करते हुए विक्रम लैंडर से 41वें दिन चन्द्रमा की सतह पर जा पहुंचा. यहां विक्रम लैंडर ने चाँद पर पहुँचकर एक तस्वीर इसरो को भेजा. लगभग 4 घंटे बाद विक्रम से निकलकर प्रज्ञान ने चाँद पर घूमना शुरू किया. ISRO द्वारा साझा की गई जानकारी मुताबिक 6 पहिए वाले रोवर प्रज्ञान में तिरंगा और इसरो का लोगो लगा हुआ है. चहलक़दमी करते हुए प्रज्ञान का कार्य ये है कि अब वो सारे डाटा शेयर करेगा. चन्द्रमा की पूरी स्थिति की जानकारी इक्कठा करने का कार्य करते हुए प्रज्ञान वहां पानी की खोज, खनिज की जानकारी और भूकंप की स्टडी भी करेगा. इसके अलावा रोवर प्रज्ञान चन्द्रमा की मिट्टी की करेगा.

चंद्रमा पर रोवर प्रज्ञान के 14 दिन

चन्द्रमा पर 14 दिन तक एक लूनर होता है. इसका सीधा मतलब ये है कि पृथ्वी का 14 दिन चन्द्रमा का एक दिन है. जानकारी मुताबिक रोवर प्रज्ञान एक लूनर के बराबर एक्टिव रहेगा. बता दें कि विक्रम लैंडर दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश कर चूका है जिससे उसके रिचार्ज करने की उम्मीद काम होगी. हालाँकि ISRO वैज्ञानिकों का कहना है कि, चुकी लैंडर रोवर प्रज्ञान सोलर पावर से चार्ज होता है तब ऐसे में वहां उसे ये सुविधा मिल सकेगी। इसके परिणामस्वरुप लैंडर चार्जेबल रहेगा. वहीँ सतह पर सभी जानकारी जुटाने में भारत कामयाब रहेगा. बता दें कि रोवर लैंडर 14 दिनों के अंदर काम करेगा.

चंद्रमा पर दिखेगा अशोक स्तंभ

14 दिन के सफर में रोवर प्रज्ञान अपनी तकनीक से ISRO को मिशन (Chandrayan-3) से जुडी हर जानकारी साझा करेगा. इस सफर के दौरान रोवर प्रज्ञान जिस भी रास्ते से आगे बढ़ेगा उस जगह से अशोक स्तंभ और इसरो का लोगो का निशान बनाते बढ़ेगा.

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