सालों पहले आवाज़ खो चुका,वैक्सीन लगते ही बोल पड़ा शख्स !

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Nisha
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कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच वैक्सीनेशन की रफ़्तार तेज़ कर दी गयी है,लेकिन इस महामारी के बदलते रूप से हर कोई परेशान है.इसी बीच जब से वक्सीनशन की प्रक्रिया देश में शुरू हुई,कई तरह की खबरें निकल कर सामने आयी,लोगों ने यहाँ तक अजीबों गरीब शिकायत करना शुरू कर दिया.जिनते अजीब इनके दावे होते हैं उसे जान कर हसी भी आती है साथ ही हैरानी भी होती है,की आखिर ऐसा कैसे संभव है. लेकिन जो आज हम आपको बताने जा रहे हैं वो एक सच्ची घटना है. क्या आप कभी सोच सकते हैं की सालों से अपनी आवाज़ खो चूका आदमी कोरोना की वैक्सीन दोसे लगने से दोबारा अपनी खोयी हुई आवाज़ पा सकता है.दरअसल,ये व्याख्या हकीकत में हुई है. ये चमत्कार कोई झूठ या मज़ाक नहीं बल्कि सच है. इस घटना के कई गवाह और साक्षी की हैं. चलिए इस पुरे घटना को विधिवत तरीके से समझते हैं और उस शक्श के बारे में बताते हैं.

झारखण्ड में हुई ये घटना किसी वरदान से काम न थी,जब किसी शक्श के जीवन में दोबारा उसकी आवाज़ मिली हो,जिसे उसने काफी सालों पहले खो दिया था. ये खबर झारखण्ड राज्य के बोकारो जिले की है,जहाँ रहने वाले एक व्यक्ति के लिए वैक्सीन की दोसे किसी आशीर्वाद से काम न था. दरसअल,करीब पांच साल पहले इस व्यक्ति ने अपना आवाज़ एक सड़क दुर्घटना में गँवान दिया. उस सड़क दुर्घटना के कारण उस शख्स के शरीर के कई अंग काम करना बंद कर चुके थे. और उसकी आवाज़ लाग्खाडने लगी थी. और धीरे धीरे वो बोलना ही बंद कर चुके थे. यहाँ तक की उस व्यक्ति की हालत ऐसी थी की वो सही के चल फिर तक नहीं सकता था.लेकिन जैसे ही उसे वैक्सीन की डोज़ दी गयी,उसकी आवाज वापस आ गई है और वह चलने-फिरने लग गया है.

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जी हाँ,झारखंड के बोकारो से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है. यहां कोरोना वैक्सीन लगते ही एक शख्स की आवाज वापस आ गई. 55 वर्षीय दुलारचंद मुंडा का दावा है कि 5 साल पहले सड़क हादसे के बाद उसकी आवाज लड़खड़ाने लगी थी. वह बोल नहीं पा रहा था. मगर जब उसे कोरोना टीके कोविशील्ड की डोज दी गई, तो आवाज बिल्कुल ठीक हो गई. अब वह बेझिझक बोल पा रहा है.

आपको बता दें की दुलारचंद मुंडा बोकारो जिले के पेटरवार के पास सलगाडीह गांव का रहने वाला है. उसका दावा है कि कोरोना रोधी टीका लगने से उसके शरीर में नई जान आ गई है.

dumb started speaking after vaccination

बीते एक साल से उसकी हालत ज्यादा खराब हो गई थी. वह घर में ही बिस्तर पर आराम कर रहा था. चलना-फिरना बंद हो गया और वह ठीक से बोल भी नहीं पा रहा था. वह घर में कमाने वाला अकेला सदस्य है, इसलिए परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया था.

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यहाँ तक की चिकित्सा विभाग की ओर से डॉ. अलबेल केरकेट्टा ने बताया कि दुलारचंद को 4 जनवरी को घर में जाकर कोरोना टीका लगाया गया था. इसके एक दिन बाद 5 जनवरी को उसके बेजान हुई शरीर में जान आ गई. डॉक्टर्स भी इसे देखकर हैरान हैं. डॉक्टर का कहना है कि उसकी रीढ़ की हड्डी में समस्या थी, हमने पुरानी रिपोर्ट्स को भी देखा है. वैक्सीन से उसकी स्पाइन की समस्या कैसे ठीक हुई, ये जांच का विषय है.

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