RUSSIA-UKRAINE के बिच क्या है विवाद का कारन? भारत किस देश को देगा अपना समर्थन? जानिए पूरी खबर विस्तार से

ज़रूर पढ़ें

अगर रूस यूद्ध करता है तो ऐसे और कड़े वित्तीय प्रतिबंध लगाए जाएंगे, जिससे रूस की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचे. अगर रूस ने आगे क़दम बढ़ाया तो अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ मिलकर जवाब देगा

अंतरास्ट्रीय स्तर पर महायुद्ध जैसे माहौल दस्तक दे चुके हैं. यूक्रेन और रूस मौजूदा वक़्त में आर पार हैं.

- Advertisement -


अब यहां खबर में सिलसिलेवार तरीके से समझायेंगे की RUSSIA और UKRAINE का मामला क्या है?
यहां सवाल ये भी उठता है की आखिर भारत मौजूदा युद्ध के हालातों में किस मुल्क का साथ देगा? हम आपको हर एक पल की अपडेट इस रिपोर्ट में देंगे.

MILLITARY


आपको इस पूरे रिपोर्ट को देखना क्यों चाहिए?

यूक्रेन और रूस दोनों के बिच अगर जंग हुआ, तब ऐसे में पूरा विश्व यानि ग्लोबली दो हिस्सों में बट जायेगा. जहाँ भारत को भी किसी एक मुल्क को चुनना पड़ेगा। यहां भारत रूस का समर्थन करता है तो पश्चिमी देश जो यूक्रेन के समर्थन में हैं.

- Advertisement -

भारत का अमेरिका से सांठ गाँठ छूट जायेगा. अब छूटने के बाद जाहिर तौर पर भारत की आपसी सम्बन्धो पर मिलकर काम करने पर पानी फिर जायेगा, और कहीं न कहीं अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा असर पड़ेगा.

यूक्रेन के समर्थन की बात करें तो, भारत अपने सबसे पुराने दोस्त रूस को खो देगा. आपकी यहां ख़ास जानकारी के लिए बता दे की हमारे यहां यानी भारत में ज्यादातर सैन्य रक्षा के जितने मिसाइले और परमाणु उपकरण आ रहे हैं, वो रूस से आएं हैं. यानी कुल मिलाकर भारत के पास एक बहुत बड़ी चुनौती है. आगे हम भारत के रुख और उससे जुड़ी पूरे उपडेट को आगे इस रिपोर्ट में बताते हैं.

UKRAINE PRESIDENT VOLODYMYR WITH MILLITARY

RUSSIA और UKRAINE के बिच आखिर तनाव क्यों है?

दरअसल, साल 2014 में यूक्रेन का हिस्सा रहे क्रीमिया पर रूस ने नियंत्रण कर लिया था. जहाँ आपको बता दे की क्रीमिया एक प्रायद्वीप है, जिसे सोवियत संघ ने साल 1954 में यूक्रेन को तोहफे में दे दिया था.

अब जैसे हीं यूक्रेन सोवियत संघ से अलग हुआ, ऐसे में कई दफा क्रीमिया को लेकर दोनों देशों के बीच तकरार शुरू होने लगा.

आपको बता दे की यहां रूस और यूक्रेन दोनों ही सोवियत यूनियन का हिस्सा रह चुके हैं. जबकि 1991 में यूक्रेन के अलग होने के बाद से दोनों हीं मुल्को के बीच विवाद अलग पैमाने पर शुरू हो गया. जबकि तकरार तब और बढ़ गया जब यूक्रेन से रूसी समर्थक राष्ट्रपति को हटाया गया.

MILLITARY RUSSIA-UKRAINE CONFLICT

आखिर तनाव और जंग के हालातों को देखते हुये कब और किस मुल्क ने कैसी पवंदिया लगाई? अबतक क्या क्या हुआ

यूक्रेन की उत्तरी सीमा से सटे बेलारूस में करीबन 30,000 सैनिकों की तैनाती हुई. जबकि यूक्रेन की सीमाओं की बात करे तो वहां तक़रीबन 1,50,000 सैनिकों, युद्धक विमानों के साथ साथ खतरनाक हथियार से लैस उपकरणों को भी तैनात किये गए हैं.

बीते सोमवार को रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने सुरक्षा परिषद की बैठक में ऐलान करते हुये पूर्वी यूक्रेन के दो अलगाववादी क्षेत्र, लुहांस्क-डोनेत्स्क को अलग देश का दर्जा देने की घोषणा कर दी.

रूस-यूक्रेन की आपसी तनाव जो अब पूरे विश्व पर प्रभाव डाल रहा है. इस सब के बीच क्रूड ऑयल की कीमत भी आठ साल के सबसे हाईएस्ट रेट पर जा चुकी है.

इन सब में ग्लोबली रूस को प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा जहाँ ब्रिटेन ने रूस के पांच बैंकों पर पाबंदिया लगा दीं.

जर्मनी ने नैचुरल गैस पाइप लाइन प्रोजेक्ट ‘नॉर्ड स्ट्रीम 2’ को मौजूदा समय में बंद करने की घोषणा कर दी. जहाँ दूसरे फेज का काम चालु था. बता दे की इसके पूरे हो जाने का रूस को फायदा होता, चुकी हर साल इससे रूस करोड़ों डॉलर कमा सकता था. पर विवादों के कारन रूस को नुक्सान झेलना पड़ सकता है.

प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंधों के पहले दौर की घोषणा कर दी

अमेरिका जिसने शुरुआत से हीं यूक्रेन की तरफ अपना रुख रखा है, ऐसे में जो बाइडेन ने भी भारतीय समय के हिसाब से बीती रात प्रेस कॉन्फ्रेंस करके रूस पर कड़े प्रतिबंधों की घोषणा की, जहाँ सबसे अहम् ऐलान था की अब रूस को पश्चिमी देशों से मिलने वाली आर्थिक मदद बंद कर दी जाएगी।

बाइडेन ने कहा है कि अगर रूस यूद्ध करता है तो ऐसे और कड़े वित्तीय प्रतिबंध लगाए जाएंगे, जिससे रूस की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचे. उन्होंने ये भी कहा अगर रूस ने आगे क़दम बढ़ाया तो अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ मिलकर जवाब देगा.

सभी प्रतिबंधों और मजबूत देशो से समर्थन न मिलने के बिच रूस के लिए सबसे अहम् साबित सेंट्रल एशिया के सारे देश का समर्थन है. जहाँ कयास लग रहे हैं की हो ना हों रूस को आगे क्यूबा, वेनेज़ुएला जैसे देशो से रूस को साथ मिल सकता है.

इन सब के बिच प्रतिबंधों की रेस में रूस पर यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों ने बैन लगाने पर सहमति जाता दी है जबकि अमेरिका ब्रिटैन और जापान पहले से हीं यूक्रेन के समर्थन में हैं. जहाँ अमेरिका ने यूक्रेन में अपनी फौज मादद के लिए भेज चुकी है.

आगे यूक्रेन और रूस के तनाव के बिच मंगलवार की देर रात यूक्रेन से 242 यात्रियों को लेकर एयर इंडिया का विशेष विमान दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) हवाई अड्डे पर सुरक्षित पंहुचा.

अंतरास्ट्रीय स्तर के अपडेट की जानकारी अनुसार अब ऑस्ट्रेलिया ने कड़ी चेतावनी देकर दुनिया को आगाह कर चुकी है कि आने वाले 24 घंटे बेहद डरावने हैं जहाँ रूस, यूक्रेन पर बड़ा हमलाबोल सकता है.

इसी क्रम में अमेरिकी विदेश मंत्री ने रूसी विदेश मंत्री से मिलने से साफ़ इंकार कर दिया है.

THE EDGE OF WAR

इन सब में भारत की रुख की बात करे तो मौजूदा केंद्र मंत्रालय इस मसले पर गहन सोच विचार करके फैसले पर पहुंचना चाहती है, जाहिर तौर पर एक फैसला लेना की रूस और यूक्रेन के बीच चुनाव करना बेहद कठिन है.

निश्चित है की भारत अपने देश की सुरक्षा और आर्थित आभाव को बिना प्रभाव डाले मामले पर शान्ति बनाये रखने की अपील करेगी। ऐसे में पूरा विश्व ये जाने के लिए उत्साहित है की आखिर भारत का रुख क्या कहता है, जहाँ किस पैमाने पर चुनाव होगा।

- Advertisement -

Latest News

PM मोदी से आम आदमी कैसे कर सकता है बात? जाने नंबर, एड्रेस से लेकर ईमेल आईडी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इतने लोकप्रिय हैं कि उनके सोशल मीडिया साइट्स पर करोड़ो फॉलोवर्स हैं. ऐसे में उनसे जुड़े...

अन्य आर्टिकल पढ़ें...