चुप-रिवेंज ऑफ़ द आर्टिस्ट रिव्यु- एक डायरेक्टर क्यों बन जाता है psychopath सीरियल किलर?

ज़रूर पढ़ें

Nisha
Nisha
--------------------------

Chup Movie Review: आज सनी देओल (Sunny Deol), दुलकर सलमान (Dulquer Salman) और पूजा भट्ट (Pooja Bhatt) की फिल्म चुप-रिवेंज ऑफ़ द आर्टिस्ट (Chup-revenge Of The Artist) रिलीज़ हो चूका है. फिल्म की इतनी चर्चा हो रही थी आज यानि की रिलीज़ के दिन लगभग हाउसफुल हैं. वहीँ इस फिल्म में क्या कुछ ऐसा है जो फिल्म की ताक़त है या कौन कौन से लूप होल्स रहे आज हम उसी बारे में बात करेंगे.

ये हैं सारे किरदार

चुप (chup) फिल्म में पहले तो हर किसी के किरदार की बात कर लेते हैं जिसमें सनी देओल (Sunny Deol) मुंबई क्राइम ब्रांच के हेड अरविन्द माथुर (Arvind Mathur), दुलकर सलमान (Dulquer Salman) एक बूके सेलर डैनी (Danny),श्रेया धन्वन्तरी (Shreya Dhanvantri) नीला मेनोन (Nila Menon) के रोल में होती हैं जो एक एंटरटेनमेंट रिपोर्टर रहती हैं. वहीँ पूजा भट्ट (Pooja Bhatt) ज़ेनोबिया (Zenobia) के किरदार में जो एक क्रिमिनल साइकोलोजिस्ट होती हैं.

- Advertisement -

ऐसी है कहानी

कहानी शुरू होती है मर्डर के केस को सुलझाते हुए जहाँ अरविन्द माथुर केस की छानबीन में लगे होते हैं लेकिन एक के बाद एक मर्डर होते चले जाता हैं और ये सारे मर्डर्स thursday नाईट हुआ करती करती है जब मूवी का प्रीमीयर क्रिटिक्स देख कर review देते हैं. किलर उसी क्रिटिक को निशाना बनता है जो फिल्म को सही रिव्यु नहीं देता यानि की रेटिंग के जरिये फिल्म के साथ इन्साफ नहीं करता. वहीँ पैरेलल ही डैनी और नीला की कहानी चल रही होती है. डैनी नीला से प्यार करने लगता है. वहीँ डैनी एक डिसऑर्डर से गुजर रहा होता है जिसकी वजह डिप्रेशन होता है,और वो डिप्रेशन और हो रहे मर्डर सब कुछ पास्ट से जुड़ा होता है. जैसे-जैसे स्टोरी आगे बढ़ती है सेकंड हाफ में जेनोबिया यानि की पूजा भट्ट की एंट्री होती है. और तब तक समझ आ चूका होता है की किलर कोई और नहीं डैनी ही है. इसी दौरान इन्वेस्टीगेशन के लिए हथियार बना कर नीला मेनोन यानी की डैनी की गर्लफ्रेंड को किलर पकड़ने में यूज़ किया जाता है और कहा जाता है की फिल्म चाहे कितनी ही अच्छी क्यों ना हो उसे सिर्फ एक ही स्टार देने को कहा गया. उसके बाद हर वीक के thrusday की तरह किलर यानि की डैनी फिर अपने शिकार तक पहुँचता है लेकिन वहां उसका सामना नीला को प्रोटेक्शन दे रहे अरविन्द माथुर से होता है बावजूद इसके डैनी अपने काम में सफल हो जाता है और तमाम सिक्योरिटी के बाच से नीला को अपने मर्डर सीन तक ले जाता है. आगे की कहानी के लिए आपका फिल्म देखना बेहद जरुरी है.

दरअसल, ये एक psychopath की कहानी है जो करीब 10 साल पहले एक फिल्म डायरेक्ट करता है लेकिन उस फिल्म को बहुत ज्यादा क्रिटिसाइज़ किया जाता है. फिल्म तो पिटती ही है लेकिन उसका करियर उसकी हिम्मत वो सारे रिव्यु तोड़ देते हैं ख़राब कर देते हैं. कहीं न कहीं डैनी यानि की सीरियल किलर खुद की कहानी को असफलता को गुरु दत्त (Guru Dutt) की आखरी फिल्म कागज़ के फूल (Kagaz Ke fool) के हश्र से तुलना करने लगता है और फिर हर किसी के फिल्म के लिए देने वाले बुरे या गलत review पर उसकी जान ले लेता है.

क्या है कमियां?

कमी की बात करें तो फिल्म में बहुत गाने नहीं है साथ ही स्टोरी का एन्ड दिल तोड़ देता है और कुछ सीन्स का कोई लॉजिक नहीं नज़र आता. वैसे फिक्शनल कहानी है हक़ीक़त से जोड़ने की कोशिश की गयी लेकिन इसका फर्स्ट हाफ थोड़ा स्लो और बोरिंग चला. फिल्म की स्टोरी भी बहुत ही जल्दी खत्म हो गयी और शुरू से ही ऑडियंस को ये आईडिया हो जाता है की किलर कौन है तो सस्पेंस इस बात पर ठहरता ही नहीं.

- Advertisement -

Latest News

अन्य आर्टिकल पढ़ें...