जब गेंदबाज़ बने बल्लेबाज़

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ज़िन्दगी में कुछ भी नामुमकिन नहीं होता ऐसा कहा जाता है की ज़िन्दगी आपको खुद को साबित करने के लिए दूसरा मौका ज़रूर देती है अब क्रिकेट के खेल में ही देख लीजिये अंतर्राष्ट्रीए लेवल पर टीम को रिप्रेजेंट करना और जगह बनाना कोई आसान काम तो है नहीं। इसी कड़ी में कुछ क्रिकेटर्स ऐसे भी है जिन्होंने शुरुवात बतौर गेंदबाज़ के रूप में की पर आज अपनी धक्कड़ बल्लेबाज़ी के कारण दुनिया भर में अपने नाम का झंडा गार बैठे है। किसी ने टीम में जगह बनाये रखने के लिए तो किसी ने खुदको साबित करने के लिए गेंदबाज़ी के साथ साथ बल्लेबाज़ी में भी अपने जगह बनाई पर आज बतौर विस्फोटक बल्लेबाज़ के रूप में जाने जाते है !!!

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इस वीडियो में आज हम बात करेंगे ऐसे खिलाड़ियों की जिन्होंने गेंदबाज़ी चोर बल्लेबाज़ी में अपना नाम विश्व भर में रौशन किया :

नंबर 7: रोहित शर्मा
हिटमैन के नाम से जानेजाने वाले और आईपीएल के अबतक के सबसे सफल कप्तान साथ ही भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा अब किसी पहचान के मोहताज़ नहीं अपने बैटिंग से अबतक कई सारे रिकार्ड्स बना चुके है लेकिन क्या आप जानते है रोहित शर्मा ने भी अपने करियर की शुरुवात बतौर स्पिन गेंदबाज़ के रूप में की थी और वह 7 वे नंबर पर बैटिंग करने आये थे पर इन्हे अपने डेब्यू मैच आयरलैंड के खिलाफ बैटिंग करने का भी मौका नहीं मिला था लेकिन किसे पता था की ये लड़का आने वाले समय का हिटमैन कहलायेगा। 2007 से लेकर 2011 तक रोहित काफी स्ट्रगल करते नज़र आये और फिर 2011 में अपने ज़बरदस्त बैटिंग अभिलिटीज़ के कारण पहले मिडिल आर्डर फिर बतौर ओपनर अपनी जगह बनाने में कामयाब रहे।

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नंबर 6 : केविन पीटर्सन
इंग्लिश क्रिकेट टीम में पीटर्सन से ज्यादा स्टाइलिश बल्लेबाज़ शायद ही कोई दूसरा होगा . क्या आप जानते है एशेज 2015 के बाद केविन पीटर्सन क्रिकेट के तीनो फॉर्मेट में मशहूर बैट्समेन बन गए और साथ ही इंग्लैंड टीम में 1 डाउन पोजीशन बनाने में कामयाब रहे पर क्या आप जानते है इन्होने ने भी अपने करियर की शुरुवात बतौर ऑफ स्पिन बॉलर किया था. डोमेस्टिक मैचेस में उन्होंने रेगुलर बोलिंग की पर उन्हें जल्द ही एहसास हुआ की उनमे और भी खूबिया है और उन्होंने खुद को साबित किया और आज मास्टर क्लास की जब बात होगी तो लिस्ट में उनका नाम शुमार होना तय है।

नंबर 5 : शेन वॉटसन
आईपीएल और पसल में ज़बरदस्त परफॉरमेंस देने वाले शेन वॉटसन ने अपने कर्रिएर की शुरुवात मध्यम पेसर के तौर पर किया था क्युकी उस दौर में ऑस्ट्रेलिया के पास मैग्रा और ब्रेट ली जैसे बोलर्स मौजूद थे जिस वजह से टीम में जगह बनाना मुश्किल साबित हो रहा था फिर वह अपनी बैटिंग को इम्प्रूव करने में लग गए और उन्होंने टीम में वापसी की फिर क्या था वॉटसन ने कभी पलट कर पीछे नहीं देखा और मिडिल आर्डर से टॉप आर्डर की बैटिंग में अपने जगह पक्की करने में सफल रहे। फिर काफी सालो तक हमने उन्हें अच्छे अच्छे बोव्लेर्स की धुलाई करते हुए देखा !!

नंबर 4 : शहीद अफरीदी
22 साल तक क्रिकेट खेलने वाले शहीद अफरीदी ने अपने बैटिंग से क्रिकेट की दुनिया में एक अलग ही जोश पैदा किया था लेकिन उन्होंने भी अपने कर्रिएर की शुरुवात एस अ बॉलर की थी। हलाकि अपने डेब्यू मैच में इन्होने कुछ ख़ास बोलिंग नहीं की पर अगले मैच में टीम मैनेजमेंट ने उन्हें ओपनिंग करने भेज दिया और उन्होंने 33 गेंदों में सेंचुरी लगाई जो रिकॉर्ड 15 सालो तक उनके नाम रहा और्व इसके बाद अफरीदी अपने धुआँधार बैटिंग से मशूर हो गए।

नंबर 3 : स्टीव स्मिथ
ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज बल्लेबाजों में शुमार और पूर्व कप्तान स्मिथ स्टीव स्मिथ को भले ही आज हम बत्तौर बल्लेबाज़ जानते हो लेकिन न्यू साउथ वेल्स में जन्मे स्टीव स्मिथ ने अपने करियर की शुरुआत लेग स्पिनर के तौर पर की थी. उन्होंने भारत, इंग्लैंड , श्रीलंका और पाकिस्तान के साथ साथ कई बड़ी टीमों के खिलाफ रिकॉर्ड बनाए हैं.
स्मिथ अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में कई उपलब्धियां हासिल की हैं. मिचेल क्लार्क़े की कपत्नी में स्मिथ ने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम को कई अहम मुकाबलों में जीत दिलाई है. अपने प्रदर्शन से सबका दिल जीत चुके स्टीव ने हर फॉर्मेट में कमाल का प्रदर्शन दिखाया है.

नंबर 2 : शोयब मालिक

शोएब मलिक टेस्ट में 1 से 10 नंबर तक अलग-अलग पोजीशन पर खेले हैं. उन्होंने सिर्फ 17 साल की उम्र में बतौर ऑफ स्पिनर डेब्यू किया था, करियर के शुरुआत में उन्होंने अपनी दूसरा गेंद से बल्लेबाजों को काफी परेशान किया था.
मलिक ने डेब्यू के कुछ समय बाद ही अपनी बल्लेबाजी पर अधिक ध्यान केन्द्रित किया, जिसके कारण उनका स्पिन से ध्यान हटता चला गया. मलिक ने पाकिस्तान के लिए 35 टेस्ट, 290 वनडे और 111 अन्तराष्ट्रीय टी20 खेले, इस दौरान उन्होंने एक बल्लेबाज के रूप में ही पहचान बनायीं.

नंबर 1 : सनथ जयसूर्या
सनथ जयसूर्या को क्रिकेट इतिहास का सबसे विस्पोटक सलामी बल्लेबाज माना जाता हैं. हालाँकि उन्हें टीम में बतौर स्पिनर मौका मिला था और 1989 से 1995 तक वह वनडे में नियमित स्पिनर ही खेलते रहे पर 1996 वर्ल्ड कप उनके करियर में टर्निंग पॉइंट साबित हुआ जब तत्कालीन श्रीलंकन कप्तान अर्जुन राणातुंगा ने उन्हें पिंच हिटर के रूप में पारी की शुरुआत कराई. जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और अन्तराष्ट्रीय क्रिकेट में 21000 से अधिक रन और 41 शतक लगायें.

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