आतंकवादी के बचाव में उतरे मदनी, कहा संविधान से ऊपर है कुरान!

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Nisha
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मौलानाओं ने देश को हर तरीके से बर्बाद करने का जिम्मा उठा रखा है, उनके लिए देश से पहले धर्म है और संविधान के ऊपर कुरान है. इन्हीं लोगों के कारण आतंकवादियों और देश विद्रोहियों को पनाह मिलती है. तभी तो आतंकियों का बचाव करने ये खुद उतर आये हैं. दरअसल, एहमदबाद में हुए सीरियल ब्लास्ट के मामले पर 18 को विशेष अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाई गयी. और साथ ही उनमें से 11 दोषियों को आजीवन कारावास हुआ. वहीँ अब इन आंतकवादियों को बचने अब उलेमा ए हिन्द कूद पड़ा है. यहाँ तक की इस लड़ाई को उच्च अदालत तक ले जाने की बात कही है. साथ ही हैरानी वाली बात ये है की इस पुरे प्लान का मास्टरमाइंड सफ़दर नागौरी ने कुरान को संविधान से बड़ा बताया है. फिलहाल वो अभी भोपाल के सेंट्रल जेल में बंद है.

अब हुआ ये की जमीयत के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने इस फैसले पर अपनी कटु टिपण्णी की है और इस मामले पर अदालत के निर्णय पर भी सवाल उठाया है. उन्होंने ने हाई कोर्ट के कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है. रिपोर्ट के मुताबिक अरशद मदनी ने कहा की जिन लोगों को को भी एहमदबाद सीरियल ब्लास्ट में फांसी की सजा सुनाई गयी है, उनकी पैरवी हाई कोर्ट में देश के नामी वाली करेंगे. सोचने वाली बात है की अब आतंकवादियों को बचने के लिए देश के बेहतर वकीलों को केस लड़ने की बात की जा रही है, जबकि ऐसे दरिंदों को तो सीधे मौत दे देनी चाहिए जिनके नज़र में किसी की जान की कोई कीमत नहीं होती. उस अल्लाह ताला को बदनाम करने के लिए उनके नाम पर जिहाद फैलते हैं और ना पाक हरकत को अंजाम देते हैं. यहाँ तक की अरशद मदनी ने इस मामले को अब सुप्रीम कोर्ट तक घसीटने की बात कही है.

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वहीँ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस मामले में सजा सुनाए गए नागौरी के साथ सिमी के 5 और आतंकी भोपाल की जेल में बंद हैं. इनके नाम शिवली, शादुली, आमिल परवेज, कमरुद्दीन नागौरी, हाफिज और अंसाब हैं. इनमें अंसाब को उम्रकैद और अन्य 5 को फाँसी की सजा सुनाई गई है. रिपोर्ट के अनुसार सजा सुनाए जाने के बाद बाद भी नागौरी के चेहरे पर कोई शिकन नहीं दिखा. उसने जेल अधीक्षक दिनेश नरगावे से कहा, “संविधान हमारे लिए मायने नहीं रखता, हम कुरान का फैसला मानते हैं.”

बता दें कि वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उस समय अहमदाबाद शहर में 26 जुलाई 2008 को लगभग 70 मिनट के भीतर 21 बम धमाके हुए थे. इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 200 लोग घायल हो गए थे. इस मामले में अहमदाबाद पुलिस ने 20 प्राथमिकी दर्ज की थी, जबकि सूरत में 15 अलग से FIR दर्ज की गईं थी.

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