हिजाब न पहनने को लेकर कट्टरपंथियों के निशाने पर आई कश्मीर की TOPPER, जिहादियों को देश की बहादुर बेटी ने दिया मुँहतोड़ जवाब

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जो लोग इस्लाम में विश्वास रखते हैं, उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पडऩा चाहिए कि मैंने क्या पहना है और क्या नहीं. मुझे इन धमकियों से कोई फर्क नहीं पड़ता और न मैं इससे घबराती हूं, हां मेरे माता-पिता जरूर कुछ डर गए हैं

श्रीनगर के डाउन-टाउन में इलाहीबाग, ईदगाह की रहने वाली देश की बेटी आरुसा परवेज ने हाल में 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 500 मेें से 499 अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान प्राप्त कर दुनिया को सन्देश दिया है की, भारत की बेटी आज हर एक मुश्किल पार कर भारत का नाम रौशन करने के लिए अपने आप में काफी मजबूत है.

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KASHMIR 12TH TOPPER RECIEVEING THREAT ON SOCIAL MEDIA FOR NOT WEARING HIJAB


एक तरफ देश में वो छात्राएं हैं जो हिजाब की मांग करते करते भारत के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहीं हैं, जिन्हे जमकर बरगलाया जा रहा है. धर्म के नाम पर देश में एक अलग माहौल पैदा किया जा रहा है. ऐसे में हिजाब विवाद पर शिक्षा के मंदिर में सम्रदायिक स्थिति पर कट्टरपंथी मुस्लिम जमकर देश की छवि खराब करने में जुटे हुए हैं.

कर्णाटक में छात्रों के बिच धार्मिक विचार पैदा करने वाले ऐसे हीं कट्टरपंथी अब कश्मीर की टॉपर आरुसा परवेज पर हमला बोल रहे हैं. आरुसा परवेज देश की वो बहादुर बेटी हैं जिन्होंने घाटी और देश की गरिमा को बढ़ाने का काम किया है. उन्हें पूरे देश से शुभकामनाएँ मिल रही है जबकि उनके शानदार कारनामे के लिए सम्मानित भी किया जा रहा है.

मौजूदा समय में आरुसा परवेज की फोटो जमकर वायरल हो रहा है, हर कोई भारत की बेटी पर नाज कर रहा है. लेकिन यहां आपको बता दे की कश्मीर की टॉपर आज कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गईं हैं, और ऐसे में जिहादियों ने देश के भविष्य को धमकियाँ भी देनी शुरू कर दी क्यूंकि उन्होंने हिजाब नहीं पहना था, जी हाँ बिलकुल सही सुन रहे हैं आप. अब ये जिहादी कट्टरपंथी महिलाओ के पहनावे पर और जमकर टिपण्णी दे रहे हैं.

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उनमे से कुछ कमेंट आप सिलसिलेवार से सुनिए, जो शायद आपको शर्मिंदा भी कर सकता है.
कश्मीर में 12वीं की बोर्ड परीक्षा में पहला स्थान प्राप्त करने वाली आरूसा परवेज की कामयाबी पर शुभकामनाओं के बिच कट्टरवादियों ने कमेंट किया जहाँ एक व्यक्ति ने लिखा, एक तरफ हमारी बेटियां कर्नाटक में हिजाब के लिए लड़ रही हैं और दूसरी तरफ कश्मीर में हम तथाकथित मुस्लिम हिजाब न पहनने पर फख्र महसूस करते हैं.

-12वीं पास कर कौन सा मुकाम हासिल किया है, सिर का दुपट्टा कहां है, बेगैरत मां-बाप की औलाद ऐसी ही होती है.


-एक अन्य ने लिखा, पर्दा नहीं किया है, इस बेगैरत की गर्दन काट दो.


-एक ने लिखा, शेम आन यूअर ड्रेस कोड, एंड आल्सो आन यूअर पेरेंट्स.


यहां ऐसे घटिया कमेंट करने वालो को देश बार बार जवाब भी दे रहा है, जो लोग देश की बिटिया के कामयाबी पर बेहद खुश हैं. लेकिन इस बिच ताज्जुब इस बात की है की हर साम्रदायिक मुद्दे में अपनी राय देने वाले पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्‍दुल्‍ला और महबूबा मुफ्ती, कश्‍मीर की टॉपर बिटिया के साथ हो रहे इस व्यहवहार पर चुप्पी साधे हुये हैं. जहाँ कई बार मुस्लिम बेटियों के हक़ में आवाज उठाने वाले ये दोनों हीं नेता फिलहाल बिलकुल मौन हैं. जबकि कांग्रेस(CONGRESS), (AIMIM) एआईएमआई सहित सभी बिपक्षी पार्टियों के बड़े बड़े नेता, प्रियंका गाँधी, असदुद्दीन ओवैसी, समेत तमाम बड़े चेहरे ने जो कर्णाटक (KARNATAKA) के हिजाब मामले पर खूब बयानबाजी की थी आज वो सभी चुप हैं.

पर आपको यहां बता दें की अब खुद आरूसा परवेज ने उन घटिया मानसिकता के कट्टरपंथी मिजाज वाले जिहादियों को जवाब दे दिया है, जहाँ आरूसा ने कहा, हिजाब पहनना या न पहनना, किसी की इस्लाम में आस्था को जानने का पैमाना नहीं हो सकता. क्या पता, मैं उनसे (धमकाने वाले) कहीं ज्यादा अल्लाह में यकीन रखती हूं. आरूसा ने कहा, मैं दिल से मुस्लिम हूं, हिजाब से नहीं। खुद को पक्का मुस्लिम साबित करने के लिए हिजाब पहनने की जरूरत नहीं है.

12TH TOPPER OF KASHMIR AROOSA PARVEZ

सोशल मीडिया में कट्टरपंथी और शरारती तत्वों द्वारा आरूसा परवेज को जमकर धमकियाँ मिल रही है, जहाँ कई आपत्तिजनक बाते भी लिखी गई है जिसपर कश्मीर की टॉपर ने कहा जो लोग इस्लाम में विश्वास रखते हैं, उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पडऩा चाहिए कि मैंने क्या पहना है और क्या नहीं. मुझे इन धमकियों से कोई फर्क नहीं पड़ता और न मैं इससे घबराती हूं, हां मेरे माता-पिता जरूर कुछ डर गए हैं.

आरूसा ने कहा, अंधेरे को रोशन करती कई सुनहरी किरणें नजर आ रही हैं. लोग मेरे साथ हैं, मुझे खुशी है कि यहां लोग मेरा समर्थन करते हुए मेरी उपलब्धि पर जश्न मना रहे हैं.


ऐसे में आरूसा परवेज को समर्थन देने के लिए और उनके बचाव में लेखक, स्तंभकार और अध्यापक फारूक शाह ने अपना समर्थन करते हुये कहा कि यह द्वेषपूर्ण व्यवहार अनुचित है. एक काबिल और प्रतिभाशाली लड़की के जीवन के सबसे हसीन पलों को भद्दी टिप्पणियों से नष्ट करने वाले सिर्फ धर्म को ही बदनाम कर रहे हैं। कौन सा धर्म इस तरह की सीख देखा है. इन्हें फैसले का हक किसने दिया है. इनका दिमाग सड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि यहां हर ऐरा-गैरा, नत्थू-खैरा, जिसने पाक कुरान के बारे में चंद बातें पढ़ी हैं, खुद को मजहब का सबसे बड़ा जानकार और ठेकेदार मानकर फतवे देना शुरू कर देता है. हमें पढ़े-लिखे सभ्य मजहबी नेता और उलेमा चाहिए.


वहीँ मौजूदा समय में आरूसा परवेज के समर्थन से देशभर से सपोर्ट मिल रहा है, जहाँ अफसोसजनक बात ये है की हिजाब विवाद पर प्रदर्शन कर रही छात्राओं को एक तरफ बड़े बड़े नामी गिरामी चेहरे सहित नेता समर्थन दे रहे हैं तो वहीँ घाटी की TOPPER पर सभी ने चुप्पी साध रखी है.

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