APJ Abdul Kalam: एक नाम जिसने इस्लामिक बुद्धिजीवियों की मुश्किलें बढ़ाई, कलाम को कहा गया ‘सिर्फ नाम के मुस्लिम’

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एपीजे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) ने समाज में एक खास छाप छोड़ी. देश को बेहतरीन से बेहतरीन मुकाम देने के लिए एपीजे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) ने अपना विशेष योगदान दिया. हर धर्म हर वर्ग उन्हें भारत का गौरव मानते हैं. क्या हिन्दू और क्या मुस्लिम, हर एक समुदाय एपीजे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) को अपना मानता रहा है लेकिन अफ़सोस की एपीजे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) को उन विशेष समुदाय के कुछ बीमार मानसिकता के लोग टारगेट करते रहे, जिनकी सोच सिर्फ देश में अशांति और नफरत फैलाना रहा है.

एपीजे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) देश के लिए एक नायाब हीरा थें. 15 अक्टूबर को तमिलनाडु (Tamilnadu) के रामेश्वरम में मिसाइल मैन एपीजे अब्दुल कलाम (Missile Man APJ Abdul Kalam) का जन्म हुआ था. आज का दिन भारतवर्ष के लिए एक अनोखा दिवस है. एक महान नेता जिन्हें हर कोई प्रेरणा मानता रहा. एपीजे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) ने समाज में एक खास छाप छोड़ी. देश को बेहतरीन से बेहतरीन मुकाम देने के लिए एपीजे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) ने अपना विशेष योगदान दिया. हर धर्म हर वर्ग उन्हें भारत का गौरव मानते हैं. क्या हिन्दू और क्या मुस्लिम, हर एक समुदाय एपीजे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) को अपना मानता रहा है लेकिन अफ़सोस की एपीजे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) को उन विशेष समुदाय के कुछ बीमार मानसिकता के लोग टारगेट करते रहे, जिनकी सोच सिर्फ देश में अशांति और नफरत फैलाना रहा है.

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एपीजे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) की उपलब्धियां भले हीं देशवासियों के लिए अतुल्य और अमूल्य है लेकिन कुछ मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने सब दरकिनार करके अपनी नीच सोच जाहिर की है जहाँ उनका मानना एपीजे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) मुस्लिम नहीं थे. और ये सिर्फ इस वजह से चुकी एपीजे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) ने विश्व के हर धर्म का सम्मान किया.

कलाम की छवि पर प्रहार करने की कोशिश

पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक एपीजे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) के लिए भारत समेत अन्य बड़े देशों के लोग जान न्योछावर करते हैं. उनके सम्मान में आज सोशल मीडिया पर बधाइयों का ताता लगा हुआ है. आज भले हीं एपीजे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनका देश के प्रति किये गए योगदान ने आज भी दुनिया के सामने भारत को महान बनाया है, उसे भुलाया नहीं जा सकता। लेकिन कुछ मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने एपीजे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) की छवि को क्षति पहुँचाई. नाम के आगे ‘डॉ’ लगाने वाले रफीक ज़कारिया ने देश की धरोहर रहे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) पर लिखे अपने एक लेख में कहा था कि ‘वे एक पर्याप्त मुस्लिम नहीं हैं ‘

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डॉ कलाम की प्रतिमा के पास गीता रखने पर भी विवाद

यहां 27 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) की पुण्यतिथि पर उनके गृहनगर पीकारुंबू में कलाम (APJ Abdul Kalam) की वीणा बजाते हुए लकड़ी से बनी एक प्रतिमा का अनावरण किया था. ऐसे में वीणा बजाते हुए प्रतिमा और उसके आगे गीता रखने को लेकर विवाद गरमा गया हालाँकि प्रतिमा के पास कुरान और बाइबिल की प्रति भी रखी गई. ऐसे में इस मामलें पर तमिलनाडु के एक मुस्लिम समूह ने कहा कि अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) मुस्लिम नहीं थे. उन्होंने कहा कि उनका नाम अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) हो सकता है, लेकिन वो एक मुस्लिम नहीं थे. उन्होंने कहना है कि अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) ने मूर्ति की उपासना की और गुरुओं की पूजा भी की, इसलिए वह मुसलमान नहीं थे. साथ ही उन्होंने कहा कि कलाम (APJ Abdul Kalam) की प्रतिमा के सामने भगवान गीता को रखना सही है. कुरान को उनकी प्रतिमा के पास नहीं रखा जाना चाहिए.

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