भारत की प्राचीन मंदिरें – जहाँ मिलता है देवी देवताओं के होने का साक्ष !

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Nisha
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प्राचीन काल में मंदिर सामाजिक केंद्र के महत्वपूर्ण स्थल थे। मंदिर ही ऐसी जगहें थीं, जहां नृत्य, संगीत और युद्ध की कलाओं को सम्मानित किया जाता था। देश में आज भी ऐसे कई मंदिर मौजूद हैं, जो अतीत के कारीगरों की बेहतरीन शिल्प कला की याद दिलाते हैं।इन पौराणिक मंदिरों से न केवल अतीत और इतिहास जुड़ा है बल्कि इन मंदिरों की मान्यताएं भी बहुत प्रसिद्ध है.

  1. बृहदेश्वर मंदिर, तंजौर, तमिलनाडु

मंदिर को राजेश्वर मंदिर, राजराजेश्वरम और पेरिया कोविल के नाम से भी जाना जाता है। एक हजार साल पुराना यह मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की सूचि में शामिल है, और अपने असाधारण ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मूल्यों की वजह से काफी प्रसिद्ध है।

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बृहदेश्वर मंदिर एक शानदार वास्तुशिल्प निर्माण है, जो भी इस मंदिर को देखने के लिए जाता है वो इसकी संरचना को देखकर हैरान रह जाता है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि इस मंदिर को बनने के लिए 130,000 टन से अधिक ग्रेनाइट का उपयोग किया गया था। यह मंदिर दक्षिण भारतीय राजाओं की स्थापत्य कौशल और आत्मीयता को दर्शाता है।

The carvings at Kailasa Temple. ©Leonid Andronov/Shutterstock
  1. कैलाशनाथ मंदिर, एलोरा

कैलाश नाथ मंदिर महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के एलोरा की गुफाओं में स्थित भारत का एक प्रसिद्ध मंदिर है यह मंदिर अपने आश्चर्यजनक संरचना एवं वास्तुकला के लिए जाना जाता है इस मंदिर को विश्व के सबसे रहस्यमई मंदिरों में से एक माना जाता है अपनी आश्चर्य ना समझना एवं वास्तुकला के लिए यह मंदिर पूरे विश्व भर में प्रसिद्ध है।
औरंगजेब ने इस मंदिर को नष्ट करनेेे के लिए अपने 3000 सैनिकों को इस मंदिर को नष्ट करने का काम सौंपा औरंगजेब के सैनिकों ने लगभग 3 वर्षों तक मंदिर को नष्ट करने का पूर्ण प्रयास किया इस दौरान इस मंदिर को थोड़ी – बहुत क्षति पहुंची।

  1. तुंगनाथ मंदिर, उत्तराखंड
    तुंगनाथ मन्दिर उत्तराखंड के गढ़वाल के रुद्रप्रयाग ज़िले में स्थित है। यह मन्दिर भगवान् शिव को समर्पित है और तुंगनाथ पर्वत पर अवस्थित है। हिमालय की ख़ूबसूरत प्राकृतिक सुन्दरता के बीच बना यह मन्दिर तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। मुख्य रूप से चारधाम की यात्रा के लिए आने वाले यात्रियों के लिए यह मन्दिर बहुत महत्त्वपूर्ण है। तुंगनाथ मंदिर दुनिया का सबसे बड़ा शिव मंदिर है, इस मंदिर को 5000 वर्ष पुराना माना जाता है।
    इस मन्दिर को 1000 वर्ष से भी अधिक पुराना माना जाता है। यहाँ भगवान शिव के ‘पंचकेदार’ रूप में से एक की पूजा की जाती है। ग्रेनाइट पत्थरों से निर्मित इस भव्य मन्दिर को देखने के लिए प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में हज़ारों तीर्थयात्री और पर्यटक यहाँ आते हैं।
  1. जगत पिता ब्रह्मा मंदिर, राजस्थान

आपने देखा या सुना होगा कि पूरी दुनिया में ब्रह्मा जी का शक्तिपीठ के रूप में एक ही मंदिर है। जो कि राजस्थान के पुष्कर नाथ जी में है और ब्रहमा जी की पूजा घरों में क्यों नहीं की जाती और न ही किसी हवन,यज्ञ इत्यादि में जगत रचियता ब्रह्मा जी का आवाहन किया जाता है। इसके पीछ एक पौराणिक वृतांत पंजाब राज्य के कपूरथला जिले के सुल्तानपुर लोधी नामक टाउन में रखे एक अति प्राचीन ग्रंथ श्री भृगु संहिता में दर्ज है। इस ग्रंथ को पढ़ने वाले श्री मुकेश पाठक जो कि इस ग्रंथ को पढ़ने में सक्षम हैं क्योंकि यह ग्रंथ देवलिपी भृगुलिपी में लिखा हुआ है। इस ग्रंथ के अनुसार ब्रह्मा जी का एक ही मंदिर व घरों इत्यादि में पूजा न होने का कारण है महार्षि भृगु जी का ब्रह्मा जी को दिया गया श्राप। जिसका प्रभाव आज भी हम देख सकते हैं।

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  1. वरदराजा पेरुमल मंदिर, तमिलनाडु

भारत के तमिलनाडु में स्थित है, कांचीपुरम। हिन्दू धर्म में सात ऐसे तीर्थ हैं, जो सबसे पवित्र माने जाते हैं। उनमें से एक है कांचीपुरम। कांचीपुरम का अर्थ है, ‘ब्रह्मा का निवास स्थान’। वेगवती नदी के किनारे स्थित, मंदिरों की भूमि कहे जाने वाले इस दिव्य स्थान में स्थित हैं कई ऐसे हिन्दू मंदिर, जिनका इतिहास युगों पुराना है और जो आज भी उसी रूप में पूज्य हैं, जिस रूप में हजारों साल पहले हुआ करते थे।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता सरस्वती नाराज होकर देवलोक से इस स्थान पर आ गई थीं। इसके बाद जब सृष्टि के रचयिता ब्रह्माजी उन्हें मनाने के लिए आए तो ब्रह्माजी को देखकर माता सरस्वती वेगवती नदी के रूप में बहने लगीं। ब्रह्माजी ने इस स्थान पर अश्वमेध यज्ञ करने का निर्णय लिया। उनके यज्ञ का विध्वंस करने के लिए माता सरस्वती, नदी के तीव्र वेग के साथ आईं। तब माता सरस्वती के क्रोध को शांत करने के लिए यज्ञ की वेदी से भगवान विष्णु, श्री वरदराजा स्वामी के रूप में प्रकट हुए।

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