एक हीं लड़की से होती है घर के सभी भाइयों की शादी, समय बिताने के भी नियम

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चीन के तिब्बत में एक महिला की शादी एक हीं घर के कई भाइयों के बिच होती है. इस प्रथा को अभी भी रीती रिवाज से निभाया जाता है

एक लड़की से सभी भाइयों की शादी आज के ज़माने में आश्चर्य की बात है. महाभारत काल में पांडवों की शादी देवी द्रौपदी के साथ हुई थी. जिसका जिक्र पवित्र ग्रन्थ में दर्ज है. हालाँकि आधुनिक काल में भी एक लड़की की भाइयों के शादी की खबर होती रही है.

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इसके बाद कुछ सालों पहले तक हिमाचल और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में इससे जुड़ी खबरें आती थीं. किन्नौर जिले में बहुपति विवाह प्रचलित थे. बाद में कानून व्यवस्था और एक दशक के बाद इस प्रथा में कमी आई है. हालाँकि दुनिया में एक ऐसा देश है अभी भी है जहाँ ये प्रथा जारी है.

इस देश में नहीं बदली प्रथा

चीन के तिब्बत में एक महिला की शादी एक हीं घर के कई भाइयों के बिच होती है. इस प्रथा को अभी भी रीती रिवाज से निभाया जाता है. हालांकि, दावा कई बार हुआ कि ऐसे परिवार अब कम बचे हैं. जहां पर इस तरह की प्रथा चल रही है. लेकिन इस बारे में कई सोशलिस्ट साफ तौर पर जाहिर किया है की तिब्बत में अभी भी लड़कियों को कई पतियों के विवाह करना होता है.

कैसे होती है शादी?

तिब्बत में सबसे पहले पत्नी के साथ बड़ा भाई समय बिताता है. इसके बाद बचे हुए भाइयों की साझा पत्नी मान ली जाती है और फिर उम्र के हिसाब से पत्नी का समय मिलता है। चीन के तिब्बत पर अधिग्रहण के बाद से इस तरह की शादी का रिवाज बहुत कम हो गया है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में अभी भी ये चल रहा है.

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क्यों शुरू हुई ये प्रथा?

रिसर्च और रिपोर्ट्स के मुताबिक जमीन के बंटवारे को रोकने के लिए महिलाओं की एक ही परिवार में अन्य भाइयों से शादी करवाने की प्रथा शुरू की गई। यहां माना गए की ये प्रथा टैक्स सिस्टम से बचाता है. हालाँकि चीन द्वारा तिब्बत में इस तरह की प्रथा को 1959 से 1960 में कानूनी तौर पर बंद करने के आदेश दिए गए थे. बाबजूद इसके अभी भी लगातार ऐसी प्रथा को फॉलो किया जा रहा है.

तिब्बत स्कॉलर ने बताई सच्चाई

अमेरिकी सोशलिस्ट और तिब्बत स्कॉलर Melvyn C. Goldstein ने इस प्रथा का उल्लेख किया है. उन्होंने अपने लेख में लिखा है कि fraternal polyandry तिब्बत में बहुत कॉमन है जहां दो, तीन, चार भाई मिलकर एक ही पत्नी के साथ रहते हैं.

सभी के बच्चे भी एक साथ ही होते हैं और कौन किसका पिता है कई बार इसके बारे में पता भी नहीं होता है. ये पुराने जमाने में काफी प्रचलित था, लेकिन अब ये ना के बराबर देखने को मिलता है.

प्रथा का उल्लेख

Melvyn के लेख के मुताबिक 1950 तक तिब्बत में बौद्ध भिक्षु की संख्या 1 लाख 10 हज़ार से ज्यादा थी. इसमें से 35% से ऊपर शादी की उम्र वाले भिक्षु थे. अधिकतर परिवारों में सबसे छोटे बेटे को भिक्षु बनने भेज दिया जाता था ताकि छोटी सी जमीन का बंटवारा ना हो.

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