विवादों के बाद मनोज मुन्तशिर ने किया आदिपुरुष के डायलॉग्स में ये बड़ा बदलाव…

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फिल्म आदिपुरुष के होने के बाद तो इस फिल्म को लेकर विवाद और ज़्यादा बढ़ ही गया. जी हाँ फिल्म में कुछ ऐसे डायलॉग्स हैं, जो कई लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं

फिल्म आदिपुरुष जिसका ट्रेलर 8 महीने पहले ही रिलीज़ हो चूका था. लेकिन ट्रेलर से नाखुश हुए लोगों की वजह से इसमे बदलाव करने के 8 महीने बाद आदिपुरुष को रिलीज़ किया गया. रिलीज़ होने के बाद तो इस फिल्म को लेकर विवाद और ज़्यादा बढ़ ही गया. जी हाँ फिल्म में कुछ ऐसे डायलॉग्स हैं, जो कई लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं. यही नहीं डायलॉग्स के अलावा भी फिल्म के कई सीन्स पर भी बड़ा विरोध छिड़ रहा है. इन तमाम विरोध प्रदर्शन और सोशल मीडिया पर ट्रोल होने के बाद फिल्म के मेकर्स ने इसके डायलॉग में परिवर्तन करने का सोचा है.

मनोज मुन्तशिर ने ठानी बदल देंगे किरदारों की ज़ुबानी!

फिल्म पुरे 600 करोड़ के बजट पर बनी है. थिएटर में फिल्म को देखने के बाद सोशल मीडिया यूज़र्स विरोध प्रदर्शन पर उतर आये हैं. इस बीच 1987 में आये रमा नंदसागर (Rama Nand Sagar) द्वारा निर्मित रामायण भी काफी सुर्ख़ियों में बना हुआ है. 600 करोड़ बजट पर बने आदिपुरुष की 7 करोड़ पर बने रामायण से तुलना करते हुए तंज कसा जा रहा है.

इन सभी विवादों के बाद हाल ही में फिल्म के लेखक मनोज मुन्तशिर (Manoj Muntashir) का एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू सामने आया. जिसमे वो कहते दिखे की सिर्फ 5 डायलॉग्स से आप पुरे फिल्म को बेकार नहीं कह सकते. अगर ये 5 डायलॉग्स ठीक नहीं है तो इसे बदला जाएगा.

क्या पड़ेगा डायलॉग्स परिवर्तन से कुछ प्रभाव?

फिल्म आदिपुरुष में सबसे ज़्यादा हनुमान जी के डायलॉग्स पर सवाल उठाया जा रहा है. बता दें की उनके कुछ संवाद ऐसे थे जो लोगों को बिलकुल भी पसंद नहीं आ रहे थे. इसीलिए अब मेकर्स ने इस फिल्म के उन डायलॉग्स को बदलने का सोचा है. लेकिन आपसे सवाल है, की क्या आप डायलॉग्स परिवर्तन के बाद दोबारा आदिपुरुष देखने जाएंगे? क्या डायलॉग्स बदलने से किरदारों की लिप्सिंग पर कोई प्रभाव पड़ेगा?

आदिपुरुष के डायलॉग्स का हुआ बदलाव

1 फिल्म में एक सीन ऐसा है जब हनुमान जी मेघनात से ये कहते हुए नज़र आये थे की “कपड़ा तेरे बाप का, तेल तेरे बाप का, आग भी तेरे बाप की, जलेगी भी तेरे बाप की…. ” इस डायलॉग में सिर्फ 1 शब्द पर ही काम किया गया है, वो है “बाप” . डायलॉग कुछ इस प्रकार है “कपड़ा तेरी लंका का, तेल तेरी लंका का, आग भी तेरी लंका की, जलेगी भी तेरी लंका ही”.

2 दूसरा डायलॉग ये है की “जो हमारी बहनों को हाथ लगाएगा…. उनकी लंका लगा देंगे” अब इसे बदलकर ये बोलै गया है की “जो हमारी बहनों को हाथ लगाएगा… उनकी लंका में आग लगा देंगे” इस डायलॉग में सिर्फ आग को जोड़ा गया है.

3 तीसरा डायलॉग ये भी था जिसमे इंद्रजीत ये कहते हुए नज़र आ रहे हैं की “मेरे एक सपोले ने तुम्हारे शेष नाग को लम्बा कर दिया” जिसको बदलकर अब ये कहा जाएगा की “मेरे एक सपोले ने तुम्हारे इस शेष नाग को समाप्त कर दिया”.

4 ‘तू अंदर कैसे घुसा, तू जानता भी है कौन हूं मैं’ इस डायलॉग को अब बदलकर ‘तुम अंदर कैसे घुसे, तुम जानते भी हो कौन हूं मैं’ कर दिया गया है. जो सुनने में कैसा लगेगा ये तो अब फिल्म देखने के बाद ही पता चलेगा.

CONTENT: NIKITA MISHRA

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