बॉलीवुड इंडस्ट्री के वो कलाकार जिन्होंने रखा राजनीती में कदम, नहीं चला सत्ता पर दम

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सिनेमा जगत में नाम कमाने के बाद कई कलाकार हैं जो अपनी किस्मत सियासी जंग में भी अपनाने की कोशिश की. लेकिन अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत में ही ये अभिनेता हार मान गए

राजनीति और सिनेमा जगत का एक पुराना इतिहास रहा है. इस सत्ता की उलझी हुई दुनिया में बॉलीवुड के कई कलाकारों ने अपने हाथ आजमाने की कोशिशें भी की हैं. सिनेमा जगत में नाम कमाने के बाद कई कलाकार ऐसे होते हैं जो अपनी किस्मत सियासी जंग में भी अपनाते हैं. हमारे बीच कई ऐसे अभिनेता और अभिनेत्री मौजूद है जिन्होंने अपने एक्टिंग करियर के बाद अपना रुख राजनीति की तरफ मोड़ लिया, कइयों की जिंदगी बदल गई. तो कई ऐसे रह गए जिन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करते हुए ही हार मान गए. यूं कहे तो उनका अभिनय इस सत्ता की कुर्सी पर कुछ खास नहीं भाया. आज हम उन्हीं नेताओं की बात करेंगे जिन्होंने अपने फिल्मी करियर के बाद राजनीति में कदम रखने के बारे में सोचा.

इन नेताओं का नहीं चला राजनीतिक करियर

जब भी हम किसी राह पर तरक्की कर रहे होते हैं तो हमे वो खूब भाती है. पर कुछ समय बाद ऐसा होता है की हम अपने काम से ऊब कर किसी और काम की तरफ कदम बढ़ाना शुरू कर देते हैं. पर कई बार हमारा ये फैसला सही भी होता है तो कई बार अपने लिए फैसले को लेकर हम बुरे तरीके से पछताते हैं. कहते हैं की हर व्यक्ति के पास एक अलग कला होती है जिसको अपनाकर उसपर अपने समय को देना बेहद लाभदायक होता है.

पर क्या जब हम किसी कार्य के लिए बने ही नहीं होते और मजे में आकर उसको अपनी जिंदगी का मंजिल बना लेते हैं तो हमे इस बात का पछतावा जिंदगी भर होता है. आपसे एक सवाल है की क्या कभी आपने उन नेताओं को देखा है जिनका फिल्मी करियर से कोई वास्ता रहा हो? चलिए जानते हैं उन फिल्मी चेहरों के बारे में जिनका राजनीति में कोई खास जोर नहीं चला.

अमिताभ बच्चन

देश के महानायक अमिताभ बच्चन का फिल्मी करियर तो आपने ज़रूर देखा होगा की कैसे वो अमिताभ बच्चन से फिल्मी दुनिया के बिग बी बने. अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) के परिवार का गांधी परिवार के साथ काफी नजदीकी रिश्ता था. देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) से बिग बी की बहुत ही अच्छी दोस्ती थी. रिपोर्ट के अनुसार राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) के कहने पर ही अमिताभ बच्चन ने राजनीति में कदम रखा था. 1984 में लोकसभा चुनाव जीत कर अमिताभ बच्चन इलाहाबाद से सांसद की कुर्सी पर बैठे थे. जिसके बाद कई नेताओं ने उनकी राजनीति में दखलंदाजी करने पर राजीव गांधी (Rajiv Gandhi)से शिकायत की. रिपोर्ट के अनुसार राजनीति के इस उलझे हुए पैमाने पर बिग बी (Amitabh Bachchan) का नाम बोफोर्स घोटाले घोटाले में सामने आया. जिसके बाद बिग बी का राजनीति से मन ही उठ गया और उन्होंने ये जगत छोड़ दिया.

धर्मेंद्र कुमार

87 वर्ष के मशहूर अभिनेता धर्मेंद्र (Dharmendra) ने अपने फिल्मी करियर के अलावा राजनीति में भी काफी ज़ोर लगाया. लेकिन उन्होंने कुछ ही पल में राजनीति से तौबा कर लिया. धर्मेंद्र (Dharmendra) ने भाजपा की ओर से साल 2004 से 2009 तक राजस्थान के बीकानेर के लिए लोकसभा के सदस्य के रूप में कार्य किया था. 2004 में अपने चुनाव प्रचार के दौरान, उन्होंने एक टिप्पणी दी थी जिसमे उन्होंने कहा था कि उन्हें “लोकतंत्र के लिए आवश्यक बुनियादी शिष्टाचार” सिखाने के लिए हमेशा के लिए तानाशाह चुना जाना चाहिए. जिसकी वजह से राजनीति में उनकी कड़ी आलोचना की गई थी. लेकिन इसके बाद उनका सियासी करियर भी खत्म हो गया.

गोविंदा

फिल्मी दुनिया के हीरो नंबर वन और बेहतरी डांसर गोविंदा (Govinda) एक ऐसा नाम है जिसने सही मायने में परिश्रम को दिखाया है. अभिनेता से लेकर राजनेता बनने की कहानी में गोविंदा (Govinda) ने बेखूबी से अभिनय किया. लेकिन गोविंदा की राजनीतिक हीरो नंबर वन की कहानी काफी पीछे रह गई. गोविंदा ने 2004 में अपनी राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी. जब गोविंदा (Govinda) ने राजनीति में कदम रखा तब उन्होंने कांग्रेस पार्टी की ओर से मुंबई लोकसभा में चुनाव लड़ा था. गोविंदा (Govinda) ने चुनाव में जीत भी हासिल की थी. लेकिन इसके बावजूद भी वो लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय नहीं रहें. क्योंकि उनका फिल्मी करियर कहीं खत्म होने की कगार पर आ गए थे.

संजय दत्त 

सिनेमा में जगत के कई ऐसे सितारे हैं जिनका पारिवारिक संबंध राजनीति से काफी जुड़ा हुआ रहा है. ऐसे में इन कलाकारों के बीच हम बॉलीवुड के संजू बाबा यानी संजय दत्त (Sanjay Dutt) का नाम लेना कैसे भूल सकते हैं. संजय दत्त (Sanjay Dutt) वो नाम है जिनकी जिंदगी हमेशा विवादों से घिरी रही है. संजय दत्त (Sanjay Dutt) के पिता सुनील दत्त (Sunil Dutt) बॉलीवुड के महान अभिताओं में से एक थे जिन्होंने फिल्मी करियर के साथ साथ राजनीतिक समाजसेवा में कोई कमी नहीं छोड़ी थी.

संजय दत्त (Sanjay Dutt) का राजनीतिक सफर 2009 में शुरू हुआ जब उन्हें समाजवादी पार्टी ने लखनऊ से लोकसभा का टिकट दिया था. अपने चुनाव प्रचार में संजय दत्त राजनेताओं की भाषा बोलने लगे थे. साथ ही उन्होंने टाडा और पोटा कानून के ऊपर खुलकर बयानबाजी की. लेकिन किस्मत को शायद कुछ और मंजूर था इसीलिए संजू बाबा का चुनावी पर्चा सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया.

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