साधना के प्यार में क्यों गिरफ्तार हुए थे शादीशुदा मुलायम सिंह यादव-LOVE STORY !

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Nisha
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जिस साधना ने बचायी माँ की जान उसी के प्यार में कैसे पड़ गए थे शादीशुदा मुलायम,कब हुई थी मुलायम और साधना की मुलाकात,क्यों 10 सालों तक छुपा के रखा था अपना रिश्ता.और दुनिया के सामने मुलायम को क्यों अपनाना पड़ा वही रिश्ता.ऐसे तमाम सवालों और कई दफ़न राज़ से भरी है मुलायम सिंह यादव की लव स्टोरी.और आज हम उसकी प्रेम कहानी का खुलासा करेंगे.

80 के दशक में एक ऐसी प्रेम कहानी पनप रही थी जो राज़ बन कर कई सालों तक दबी रही.एक तरह सियासत करवट ले रही थी और दूसरी ओर किसी का प्यार एक मुकाम तक पहुंच चूका था. उत्तर प्रदेश जितना राजनीती के अँधेरे में गम है उतना ही यहाँ राज कर चुके नेताओं की ज़िन्दगी में छुपे काल सच हैं.1989 में हुए यूपी के चुनाव में एक चेहरा सामने आया था,जिसके काम,लगन और लड़कियों के उन पर फ़िदा होने के किस्से जोरों पर थे.नाम था मुलायम सिंह यादव. 1989 के इलेक्शन में जीत हांसिल कर यूपी के मुख्यमंत्री बने मुलायम,नेता जी के नाम से उबरे और आने वाले समय में उनकी जीवन की उलझन इसी पल से शुरू हो चुकी थी.मुलायम सिंह यादव कहाँ जानते थे की 40 साल बाद ये वक़्त उन्हें भारी पड़ेगा.

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उनकी पर्सनालिटी कुछ खास तो नहीं थी लेकिन फिर भी जनता और पार्टी के साथ साथ लडकियां भी उन पर फ़िदा थी. साधना और मुलायम की लव स्टोरी तब शुरू हुई थी जब देश में कांग्रेस टूट रही थी. उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्ग और सबसे अधिक यादव समुदाय का दबदबा बढ़ने लगा था. और उसी दौरान जनता को उनके नेता जी मिल गए थे.

वहीँ हैरानी वाली बात ये है की इन दोनों के प्यार का साक्षी केवल एक ही इंसान था,अमर सिंह लेकिन अब वो भी इस दुनिया में नहीं रहा. वहीँ मुलायम में इतनी हिम्मत भी नहीं थी इस नए रिश्ते के बारे में अपनी पहली पत्नी और अखिलेश को बताते.वो भी इस बात से अनजान रहे की अभी चोरी चिप्पे बढ़ रही नद्दीकियाँ 40 साल बाद किसी से दूरियों की वजह न बन जाए.

उस वक़्त न तो समाजवादी पार्टी था और नाही कोई राष्ट्रीय लोकदल.एक गाओं में 23 साल की लड़की समाज के लिए कुछ करने की छह पाल रही थी,नर्सिंग के जरिये उसने ऐसा शुरू भी किया लेकिन राजनीती के सहारे वो कुछ बड़ा करना चाहती थी,इसलिए राजनितिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेना शुरू किया,और यूँ हीं एक दिन मुलायम सिंह यादव से टकरा गयी,वो लड़की देखने की सुन्दर थी,फिर क्या मुलायम की नज़रें हटी ही नहीं,वो लड़की कोई और नहीं साधना गुप्ता थी.

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ये रिश्ता तब और गहरा हो गया जब साधना ने मुलायम की माँ की जान बचायी थी,मुलायम की माँ ही वो कड़ी थी जो मुलायम और साधना को करीब ले आयी थी. दरअसल,मुलायम की माँ की तबियत ख़राब थी जिसके कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था,और किस्मत से साधना भी उसी नर्सिंग होम में थी. ये किस्सा सुनने में तो बहुत फिल्मी है लेकिन हकीकत भी यही थी.जब मुलायम की माँ की हालत ख़राब हो रही थी तो एक नर्स उन्हें जल्दबाज़ी में गलत इंजेक्शन देने जा रही थी तभी वहां साधना आ जाती है और ऐसा करते देख नर्स से इंजेक्शन ले लेती है और फिर सही इंजेक्शन उनकी माँ को देती है,इस तरह से वो मुलायम सिंह यादव की माँ को बचा लेती है,इसके बाद वो मुलायम के दिल के और करीब आ जाती हैं,और साधना के लिए मुलायम का प्यार भी बढ़ जाता है. उसके बाद साधना मुलायम की माँ का खास ख्याल रखने लगती है. और धीरे धीरे साधना उनकी माँ को भी काफी पसंद आ जाती हैं.
साल 1988 आया और एकसाथ कई चीजें बदल गईं। उस दौरान मुलायम मुख्यमंत्री बनने की चौखट पर खड़े थे और साधना भी अपने पति से अलग रहने लगी थीं। उस समय उनकी गोद में एक बच्चा भी था। इन सब के बीच मुलायम ने अखिलेश को साधना से मिलवा भी दिया था।

अब आ चूका था साल 2 जुलाई 2005,मुलायम सिंह यादव के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दर्ज़ किया गया. सवाल था की 1979 में जिस मुलायम सिंह यादव के पास केवल 79 हज़ार की संपत्ति थी वो अचानक से करोड़पति कैसे बन गया. इसके बाद कोर्ट ने मुलायम के पीछे सीबीआई की टीम लगा दी थी.और 2007 के जाँच में पता चला था की मुलायम की दूसरी पत्नी और उनसे एक बेटा भी है.तब जा कर ये बात सामने आयी की यह सब 1994 से है। 1994 में ही प्रतीक गुप्ता ने स्कूल के फॉर्म में परमानेंट रेसिडेंस में मुलायम सिंह यादव का ऑफिशियल एड्रेस लिखा था। मां के नाम के जगह साधना गुप्ता और पिता के नाम के जगह एमएस यादव लिखा था। यही नहीं 23 मई 2003 को मुलायम ने साधना को अपनी पत्नी का दर्जा दे दिया था। मुलायम ने 2007 में आय से अधिक संपत्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक शपथपत्र दिया। इसमें मुलायम ने लिखा कि, “मैं स्वीकार करता हूं कि साधना गुप्ता मेरी पत्नी और प्रतीक मेरा बेटा है।”लेकिन ये बाद किसी को पता नहीं थी थी या यूँ कहें की ज्यादा लोग जानते नहीं थे.यह सब कुछ पता तो सबको था लेकिन घर में कोई कहता कुछ नहीं था। और इसी साल उनकी पहली पत्नी का निधन भी हो गया था.अखिलेश को शुरू-शुरू साधना बिलकुल अछि नहीं लगती थी,एक बार तो साधना ने अखिलेश को थप्पड़ भी मार दिया था. लेकिन आज भी समय ने उस खलीपन को पूरी तरह नहीं भरा है.

दरअसल,साधना से शादी का फैसला यूँ ही नहीं हुआ था,साधना गुप्ता ,मुलायम सिंह यादव के लिए बहुत लकी साबित हुई थी. साधना ने मुलायम की ज़िन्दगी में 1988 को दस्तक दी थी और 1989 में वो सीएम बन गए थे.मुलायम के लिए साधना लकी चार्म थी.

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